Portfolio kya hai | Portfolio in Hindi

Portfolio kya hai : दोस्तों अपने portfolio का नाम जरूर कहीं ना कहीं सुना होगा लेकिन क्या इसके बारे में आप जानते हैं यह क्या होता है इसका मतलब क्या होता है अधिकतर portfolio शब्द आपने अक्सर Share market या Mutual fund संबंधित समाचारों में सुना होगा लेकिन यदि दोस्तों आप ऑनलाइन माध्यम से कमाई करना चाहते हैं चाहे वह शेयर मार्केट से या फिर मैचुअल फंड से हो तो सर्वप्रथम आपको एक अच्छे संतुलित Portfolio की आवश्यकता होगी इसलिए इस portfolio को जानना बहुत जरूरी है तो दोस्तों आज हम इस लेख में portfolio संबंधित जानकारी जैसे portfolio क्या होता है इसके कितने प्रकार होते हैं तथा संतुलित Portfolio बनाने के लिए हमें किन किन बातों को ध्यान में रखना होगा ऐसी और भी जानकारी को जानेंगे तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं इस लेख को,

Portfolio का होता है ?

Portfolio का सामान्य अर्थ किसी समूह से हैं कहने का आशय यह है कि विभिन्न प्रकार की क्रय की गई या खरीदी गई यूनिट, शेयर या प्रतिभूतियों के समूह को हम पोर्टफोलियो के नाम से जानते हैं l

जैसे आप समझ सकते हैं कि हमारे पास बहुत सारी सामग्री या वस्तुएं हैं जिसे इकट्ठा करके रखने के लिए हमें एक बॉक्स की आवश्यकता होगी यही बॉक्स पोर्टफोलियो है और यही सारी सामग्रियां और वस्तु यूनिट, शेयर और प्रतिभूतियां है l

Portfolio के प्रकार

हर सामग्री हम एक बॉक्स पर नहीं रख सकते अर्थात अलग-अलग संबंधियों को रखने के लिए हमें अलग-अलग बॉक्स की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार अलग-अलग सामग्रियों के लिए अलग-अलग पोर्टफोलियो है और हर पोर्टफोलियो की अलग-अलग खास बात है जिसके विवरण को हमने नीचे प्रस्तुत किया है I

कंबाइंड पोर्टफोलियो ( Combined portfolio ) ;

अगर एक या एक से अधिक व्यक्ति ने मिलकर अलग-अलग जगह पर निवेश किया हो तो उन दोनों के निवेश का एक सामान (common) पोर्टफोलियो बन सकता है जिसे हम कंबाइंड पोर्टफोलियो के नाम से भी जानते हैं।

उदाहरण के लिए म्युचुअल फंड क्योंकि इसमें एक से अधिक व्यक्तियों के पैसे लगे हुए होते हैं।

आक्रमक पोर्टफोलियो ( Aggressive portfolio ) ;

यह पोर्टफोलियो का एक प्रकार होता है जो कि निवेशकों (investor) के लिए होता है लेकिन उस उन निवेशकों के लिए होता है जो हर समय ज्यादा से ज्यादा जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं क्योंकि इस आक्रमक पोर्टफोलियो में 70% हिस्से पर ब्लू चिप्स कंपनियां काम करती हैं और शेष बचा 30% हिस्से पर नियमित आय वाले तथा शॉर्ट टर्म मनी मार्केट फंड की हिस्सेदारी होती है और इसमें money invest कम से कम 15 वर्ष एक लंबे समय तक के लिए करना होता है l

कमाई प्रमुखता वाला पोर्टफोलियो (income preservation portfolio ) ;

यह portfolio  का एक ऐसा प्रकार होता है जिसमें निवेशक कम समय में ही कमाई अर्थात आएगी प्राप्ति शुरू कर सकते हैं तथा इस पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट आसानी से किया जा सकता हैं क्योंकि इसमें खतरे का डर बहुत कम होता है तथा यह चंचल प्रतिभूतियों से दूर रहते हैं क्योंकि यह बहुत ही कम जोखिम वाला होता है इसलिए निश्चित आय कमाने वाली प्रतिभूतियों की संख्या अधिक होती है जैसे  ब्रांड, डिवेंचर और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट आदि लेकिन इस पोर्टफोलियो में विविधता के उद्देश्य इस पोर्टफोलियो में भी थोड़ा संख्या में कुछ ब्लू चिप शेयर शामिल कर लिए जाते हैं l

विविध पोर्टफोलियो ( Diversified portfolio ) ;

यदि निवेशक ने अपने सभी पैसों को अलग-अलग बहुत सारे जगहों पर निवेश विकल्पों में लगाया है तो उसे विविध पोर्टफोलियो कहते हैं हालांकि ऐसा निश्चित नहीं है कि निवेशक इसे कितने विकल्पों पर निवेश करते हैं। अर्थात विविध करने का मतलब अपने निवेश के जोखिम को कम करना होता है जिस पर आपका पैसा सिर्फ एक ही विकल्प पर ना होकर अलग-अलग भी पलकों में हो जिससे अगर एक दो विकल्प में नुकसान होता भी है तो आपका पूरा पैसा ना डूबे।

धन कमाओ पोर्टफोलियो ( wealth builder portfolio );

यह पोर्टफोलियो का प्रकार भी आक्रमक पोर्टफोलियो की तरह ही होता है इसलिए आक्रमक पोर्टफोलियो की तुलना में इस पोर्टफोलियो में थोड़ा कम जोखिम होता है लेकिन इस पोर्टफोलियो में भी निवेशकों को अधिक मात्रा में जोखिम सहन करना पड़ता है क्योंकि इसका निवेश समय 10 वर्ष के लिए होता है l

और इस श्रेणी के इन्वेस्टर्स तत्काल अपने आए कमाने में भरोसा नहीं रखते बल्कि वह चाहते हैं कि उनकी पूंजी उनको कई गुनी बढ़कर मिले या वापस हो इसलिए इस पोर्टफोलियो में अच्छी कंपनियों के शेयरों का कब्जा होता है l

परंपरावादी पोर्टफोलियो ( Conservation portfolio ) ;

इस प्रकार की पोर्टफोलियो ज्यादातर सेवानिवृत्त या बुजुर्ग नागरिकों के लिए ठीक रहता है क्योंकि इस पोर्टफोलियो में निदेशक अपनी बचत का अधिकांश हिस्सा नियमित आय प्रदान करने वाली प्रतिभूतियों में लगाते हैं और कुछ शेष बची पूंजी वृद्धि वाली प्रतिभूतियों पर इन्वेस्ट कर देते हैं इस श्रेणी में आय नहीं चाहते बल्कि 2 से 4 वर्ष के मध्य वाले अपने दायित्वों के निपटारे के लिए अपनी कमाई चाहते हैं इसलिए यह पोर्टफोलियो नियमित आय प्राप्त करने के इच्छुक निवेशकों के लिए होता है।

पूंजी वृद्धि एवं आए पोर्टफोलियो (Growth & Income portfolio ) ;

यह पोर्टफोलियो उन निवेशकों के लिए होता है जो तत्काल आए नहीं चाहते बल्कि अपने भविष्य का सोचते हैं और भविष्य के लिए इनकम चाहते हैं और अपनी पूंजी में वृद्धि भी, इस प्रकार की पोर्टफोलियो में लगभग 40% हिस्सा ग्रोथ शेयर में और लगभग 20% हिस्सा शॉर्ट टर्म प्रतिभूतियों में इन्वेस्ट किया जाता है इसलिए ऐसे निवेशकों को जोखिम सहन करने की क्षमता भी संतुलित होती है।

हम एक अच्छा पोर्टफोलियो किस प्रकार बनाएं

यदि दोस्तों आप अधिक लाभ कमाने के लिए एक अच्छा पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं तो आपको सर्वप्रथम अपने निवेश की धनराशि के बंटवारे पर ध्यान देना होगा अर्थात निवेश के विभिन्न विकल्पों के माध्यम से अपना निवेश या इन इन्वेस्टमेंट की धनराशि का बंटवारा सुनिश्चित करना होगा दूसरे शब्दों में हम इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं कि आपको विविन म्यूचुअल फंडों और उनकी स्कीमों के माध्यम से अपने धनराशि का बंटवारा करना होगा। तथा आपको यह भी जानना होगा कि किसी स्कीम पर कितना धन लगाना है, निवेश को लगातार रिव्यू करना है अर्थात रिव्यू करते रहना है और बदलते रहना है, तब कुछ समय बाद आप एकदम फिट पोर्टफोलियो के मालिक बन जाओगे रिसर्च बताती है कि किसी पोर्टफोलियो में 90% आए Asset allocation पर निर्भर करती है।

तथा शेष बचा 10% आए फंड 19 की स्कीम के चुनाव पर निर्भर करता है क्योंकि सभी की रूचि सामान्य नहीं होती।

अच्छे पोर्टफोलियो के लिए संतुलन की आवश्यकता

यदि कोई भी निवेशक एक लंबे समय से विनियोग करते आ रहा है तो उसके पास सुनिश्चित ही एक अच्छा पोर्टफोलियो हो गया होगा, अतः अब उसको जरूरत है कि वह अपने पोर्टफोलियो का नियमित रूप से मूल्यांकन करें और उसमें संतुलन बनाए रखें जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पोर्टफोलियो से जो भी उम्मीद थी वह पूरी हो रही है।

निवेशक द्वारा अपने पोर्टफोलियो की जांच करते समय एवं उसको संतुलित करते समय कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखा जाए तो निवेशक को प्राप्त परिणाम कमाई की दृष्टि से बेहतर हो सकते हैं।

उस बातों को हमने नीचे प्रस्तुत किया हुआ है –

  • यदि निवेशक के पास समय कम है अर्थात वह इस मूल्यांकन एवं संतुलन के कार्य में समय कम दे पा रहा है तो उसे इस कार्य को वार्षिक आधार पर करना चाहिए।
  • यदि किसी कारणवश निवेशक को मूल्यांकन के समय अपने पोर्टफोलियो से कुछ यूनिट या शेयर हटाने पड़े तो उसे बिना हिचकी चाय हटा देनी चाहिए फिर चाहे वे ऊंचे मूल्यों के कारण बेचना पड़े या आधे मुंह बड़े शहरों को हटाने के लिए, निवेशक को ऐसे यूनिट को बेचकर तुरंत कम कीमत के यूनिट खरीदकर अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करने का प्रयास करना चाहिए।
  • निवेशक को वार्षिक इनकम टैक्स को भी ध्यान में रखकर शेयर और यूनिट में हेरा फेरी करनी चाहिए ताकि इनकम टैक्स का दायित्व कम से कम हो सके।
  • निवेशक को अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखने के लिए किसी भी यूनिट या शेयर से मोह नहीं करना चाहिए।
  • इन सबके अलावा यदि निवेशक की निवेश नीति या उद्देश्य में किसी भी प्रकार का बदलाव आता है तो निवेशक को उसी के अनुरूप अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करना चाहिए।
  • यदि निवेश से विशेष तौर पर निवेशक को म्यूचल फंड उसे कमाई करनी हो तो लंबे समय तक के लिए सोचो अर्थात दीर्घकालीन का प्लान बनाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष :

दोस्तों आज हमने सीखा कि Portfolio का मतलब क्या होता है और कुछ उदाहरणों से इसे समझा हम उम्मीद करते हैं कि आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित हुई होगी और यदि आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों तक Share करना बिल्कुल ना भूलें तथा शेयर बाजार से जुड़ी अपडेट को जानने के लिए आप हमें कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं।

धन्यवाद।।।

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