प्रदुषण (Pollution) क्या है – Pollution In Hindi | प्रदूषण के प्रकार |

Pollution In Hindi – नमस्कार दोस्तों आज हम एक ऐसे टॉपिक के बारे में बात करेंगे जो एक चुनौती तो है लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर उस कार्य को किए जा रहे हैं उसका नाम है प्रदूषण जैसे की हम सब जानते हैं कि प्रदूषण एक आपातकालीन चुनौती है इन सब के बारे में संपूर्ण अध्ययन हम इस लेख के माध्यम से करेंगे अत: इस लेख को अंत तक पढ़े ।

प्रदूषण (Pollution) क्या है – Pradushan Kya Hai

Pollution Essay In Hindiप्रदूषण का समान अर्थ , वायु, जल, मिट्टी आदि का अवांछित द्रव्यसे दूषित होना जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष से उल्टा प्रभाव पड़ता है तथा पर्यावरण में दूषण पदार्थ के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलित में पैदा होने वाले दोष अर्थात प्राकृतिक में होने वाले गंदगीया को हम प्रदूषण कहते हैं प्रदूषण पर्यावरण को तथा जीव जंतुओं को नुकसान पहुंचाता है। और पर्यावरण प्रदूषण मनुष्य को,

यदि जो मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुएं हैं मानव द्वारा बनाई गई है उससे  बचे अवशेषों को प्राकृतिक निर्मित वस्तु के अवशेषों के साथ मिलाया जाता है तब दूषित पदार्थ का निर्माण होता है और जो दूसरे पदार्थ होते हैं उनका चाह कर भी पुनर्चक्रण नहीं किया जा सकता किसी भी कार्य को पूर्ण करने के पश्चात शेष बचे अवशेषों को प्रथक रखने से इनका पुनर्चक्रण वस्तु से वस्तु में किया जा सकता है एवं ऊर्जा में, लेकिन इसे समाप्त नहीं किया जा सकता यही प्रदूषण का कारण भी होता है।

यह सभी जानते हैं कि पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है इसके वायुमंडल में 4 लेयर होती है उसी में से सबसे नजदीकी लगभग 50 किलोमीटर की ऊंचाई में स्ट्रेटोस्फीयर है जिसमें ओजोन स्तर होता है इस ओजोन स्तर का कार्य सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुंचाने से रोकती है जिसके कारण पृथ्वी के तापमान का स्तर बना हुआ है और आज ओजोन स्तर का दिन प्रतिदिन विघटन हो रहा है।

अधिक उपकरणों के उपयोग के कारण वायुमंडल में क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस CFC के कारण ओजोन का विघटन हो रहा है इस विघटन को सन 1980 में देखा गया तथा नोट किया गया था और यह भी देखा गया कि ओजोन स्तर का विघटन संपूर्ण पृथ्वी के चारों ओर हो रहा है उसी में एक दिशा दक्षिण ध्रुव के विस्तार ओं में ओजोन स्तर का विघटन 40% से 50% अभी हो चुका है अर्थात इसी सभी कारणों से स्टेटसपियर में उपस्थित ओजोन परत में दूषण के कारण होने वाली घटना को हम ओजोन छिद्र या ओजोनहोल कहते हैं।

ओजोन परत में छिद्र हो जाने के कारण कई ऐसी घटना घटी है जो यह साबित करती है कि सही में स्ट्रेटोस्फीयर में उपस्थित ओजोन परत में छिद्र हो गया है जैसे कि ध्रुवी प्रदेश मेंजमा बर्फ पिघलने लगा है तथा सबसे बड़ी चुनौती चर्म रोग जिसका सामना अब मानव को करना पड़ रहा है।

यह समस्या एयरकंडीशनर रेफ्रिजरेटर में प्रयोग होने वाली फ्रीऑन और क्लोरोफ्लोरोकार्बन(CFC) गैसों के कारण उत्पन्न होने वाली समस्या है आज इन्हीं गैसों के कारण हमारा वातावरण दूषित होते जा रहा है वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाली गैस से हवा वायु प्रदूषित होते जा रही है तथा मानव क्रियाकलापों द्वारा उत्पन्न अवशिष्ट पदार्थों को नदी और तालाबों में छोड़ा जा रहा है जिससे जल प्रदूषित हो रहा है तथा फैक्ट्रियों तथा मानव द्वारा निर्मित वस्तुओं के अवशेषों को पृथक ना करने के कारण बने कचरे को फेंके जाने के कारण भूमि प्रदूषित हो रही है ।

प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं – Types Of Pollution In Hindi

प्रदूषण के प्रकार

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution)
  • जल प्रदूषण (Water Pollution)
  • भूमि प्रदूषण (Land Pollution)
  • ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
  • प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution)

1.वायु प्रदूषण (Air Pollution In Hindi)

Vayu Pradushan Kya Hai – वायु प्रदूषण अर्थात हवा में उपस्थित ऐसे अवांछित गैस धूल के कण जो मानव तथा प्राकृतिक दोनों के लिए खतरनाक हैं अर्थात खतरे का कारण बन गए हैं वायु का किसी भी कारण से दूषित हो ना वह वायु प्रदूषण कहलाता है तथा वायु में उपस्थित वाह तत्वों की उपस्थिति जो आज मानव तथा जीव जंतु दोनों के स्वास्थ्य अथवा कल्याण हेतु हानिकारक है उसे वायु प्रदूषण का नाम देते हैं और ऐसी स्थिति को वायु प्रदूषण कहते हैं ।

वायु प्रदूषण होने के कई ऐसे कारण हैं जो आज एक चुनौती के समान प्रतीत होते दिख रहे हैं।  दूसरे शब्दों मे कहे तो प्रदूषण अर्थात दूषित  होना या गंदा हो ना आज बरती टेक्नोलॉजी की वजह से कहीं ना कहीं किसी भी तरीके से वायु भी दूषित होते जा रही है जो अत्यंत संकट की बात है।

वायु प्रदूषण के कारण

– इस प्रदूषण के कुछ सामान्य कारण है|

  • वाहनों आदि जिन्हें लोग अपनी सुख सुविधा के लिए उपयोग में ले रहे हैं इससे निकलने वाला धुआं एक प्रमुख कारण का हिस्सा है।
  • वैज्ञानिक द्वारा किए गए रासायनिक क्रिया कलाप  तथा औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं यह भी इसके कारण में शामिल है।
  • आणविक संयंत्रओं में निकलने वाली गैस तथा धूल कण यह भी वायु को दूषित करते जा रहे हैं जिससे वायु प्रदूषित नजर आ रहा।
  • लोग ठंडी के समय कोयले को जलाते हैं उससे निकलने वाला धुंआ जंगल में पेड़ पौधे को जलाने से तथा जो तेल के कारखाने होते हैं उस पर तेल शोधन के समय निकलने वाला धुआं भी इसके कारक के रूप में देखा गया है।
  • तथा एक महत्वपूर्ण कारण जो कि ज्वालामुखी विस्फोट इससे उत्पन्न ज्वाला जो कि आसपास के चीजों को जलाकर धुआं उत्पन्न कर देती है तथा स्वयं विस्फोट के समय जो धुआं उत्पन्न करती है यह भी इसके कारण में शामिल है।

वायु प्रदूषण से होने वाला प्रभाव

यदि वायु दूषित होगी तो हम कैसे सुरक्षित रह सकते हैं इसी प्रकार वायु प्रदूषण हमारे वातावरण तथा हमारे ऊपर अनेक प्रभाव डालती है उसमें से कुछ निम्नलिखित है।

  • यदि वायु प्रदूषित हो जाती है और उसका कारण गैस की उपस्थिति तो उससे मनुष्य, पशुओं तथा पक्षियों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है इससे दमा ,अंधापन ,सर्दी खांसी, श्वास का कमजोर होना, चरम रोग अर्थात त्वचा रोग जैसी बीमारी पैदा होती है और लंबे समय के बाद इसके कीटाणुओं की जननी विकृतियां उत्पन्न हो जाती है और यह नुकसान पहुंचाना तथा चरम सीमा पर यह घातक भी हो सकती है।
  • वायु प्रदूषण के कारण प्राकृतिक दृश्यता में कमी आती है अर्थात वायु के दूषित की वजह से सर्दियों में कोहरा छाया रहता है तथा इस कोहरे की वजह से आंख में जलन जैसी काफी सारी समस्या उत्पन्न होने लगती है।
  • जब वायु प्रदूषण क्षेत्र में वर्षा होती है तब वायु में विभिन्न प्रकार की जहरीली गैस तथा अपशिष्ट पदार्थ मिले रहते हैं जो वर्षा के समय वर्षा में मिलकर घूल जाते हैं और धरती में आ जाते हैं जिससे अम्ल वर्षा (ACID RAIN) कहा जाता है।
  • वायु प्रदूषण के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ता है क्योंकि जब ओजोन परत पर छिद्रहै तो सूर्य से आने वाली(UV RAYS ) पराबैगनीकिरणे सीधा पर्यावरण में प्रवेश करती है जिससे धरती पर कार्बन ,मिथेन तथा नाइट्रसऑक्साइड इन सब का प्रभाव कम नहीं होता जो कि हानिकारक है।
  • सीधा सूर्य की गर्मी जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है और मानव के ऊपर आ गिरती है उसे कैंसर जैसी महा बीमारी उत्पन्न होती है।

2.जल प्रदूषण (Water Pollution In Hindi)

Jal Pradushan Kya Hai – जल प्रदूषण का अर्थ है कि पानी में अवांछित विषैले पदार्थ तथा घातकतत्वों की उपस्थिति के कारण पानी का दूषित होना जो नुकसानदायक हो जिससे हम पीने योग्य पानी नहीं मान सकते जैसे कि नदियों के पानी में अपशिष्ट पदार्थ के कारण पानी दूषित हो रहा है जिससे हम पीने में कतराते हैं।

जल प्रदूषण के कारण

जल प्रदूषित होने के कुछ कारण निम्नलिखित है

  • बड़ी-बड़ीफैक्ट्री उद्योगों कारखानों से निकलने वाली अपशिष्ट पदार्थ जी से सीधा नदियों से जोड़ा जाता है यह भी कारण के रूप में देखा जा सकता है।
  • मानव मल का विसर्जन नदी तालाब और नेहरू आदि में विसर्जन करना।
  • नदी तालाबों नेहरू आदि में साफ-सफाई तथा सीवर का उचित प्रबंध ना होना।
  • जितने भी प्रकार की उद्योग हैं उन सभी इकाइयों का कचरा तथा गंदा पानी का सीधा विसर्जन करना।
  • खेती में उपयोग होने वाली जहरीली रसायनों तथा खादों का पानी तथा उस से निर्मित गंदा पानी यह सब कास्वच्छपानी में घुल ना।
  • घरों में उपयोग होने वाली सामग्री तथा घरों से निकलने वाला कूड़ा कचरा मानव-शवो और पारंपरिक प्रथाओं का पालन करते हुए उपयोग में आने वाली सामग्रियों का सीधा विसर्जन।
  • गंदे नालों तथा शिविरों का पानी नदियों में छोड़ना।
  • कच्चा पेट्रोल आदि तेलों को जब कुओंसे निकाला जाता है तब उसका कुछ पदार्थ समुद्र में मिल जाता है जिससे जल प्रदूषित हो जाता है।
  • डीडीटी एवं बीएचसी आदि कुछ कीटनाशक पदार्थ के छिड़काव से भी जल प्रदूषित होता है जिससे समुद्री जीव को हानि पहुंचता है जो खाद्य श्रंखला को प्रभावित करता है।

जल प्रदूषण से होने वाला प्रभाव

जल जो मानव के लिए अत्यधिक आवश्यक है उसके प्रदूषित होने की वजह से कई ऐसी बीमारी उत्पन्न होती है जो नुकसान दायक है और ऐसी कई चीजें हैं जो जल प्रदूषण को प्रभावित करती है जो निम्नलिखित हैं।

  • जल प्रदूषित होने के कारण विभिन्न निजी तथा वनस्पति प्रजातियों को भारी नुकसान पहुंचता है।
  • इसे पीने का पानी की समस्या भी उत्पन्न होती है क्योंकि तलाब नहर नदियों यहां तक की धरती के अंदर का भी पानी प्रदूषित होते जा रहा है।
  • जल में रहने वाले जीव जंतु की मृत्यु की एक बड़ी चुनौती है क्योंकि जो सूक्ष्मजीव होते हैं वह जल में घुले हुए ऑक्सीजन के एक बड़े भाग को अपने उपयोग के लिए अवशोषित कर लेते हैं जब जल में जैविक द्रव की मात्रा बढ़ जाती है तब उस जल में ऑक्सीजन की मात्रा ना के बराबर हो जाती है जिससे जली जीव जंतु की मृत्यु हो जाती है।
  • इससे अनेक जीव तथा वनस्पतिकप्रजातियों को नुकसान पहुंचता है।
  • यदि जल प्रदूषित रहता है और उस जल का प्रयोग खेती करने में लगा दे तो जल में उपस्थित प्रदूषक तत्व पेड़ पौधों में प्रवेश कर जाएंगे जिससे पौधे और उनके फल को खाने से अनेक भयंकर बीमारियां पैदा हो जाती हैं।
  • समुद्रों की शान मछली डॉल्फिन और टूना इन सब में भी भारी संकट आता जा रहा है मनुष्य द्वारा पूरे भूभाग का कचरा समुद्र में डाला जा रहा है और नदी भी अपना दूषित जल समुद्र में डाल रही है नदी अपने साथ-साथ समुद्र को भी दूषित कर रही है इसी को लेकर वैज्ञानिक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भूमध्य सागर में कूड़ा कचरा डालना बंद ना किया गया तो सागर शीघ्र ही इन सुंदर मछलियों का कब्रगाह बन जाएगा।
  • रासायनिक पदार्थ प्राप्त क्लोरीन,अमोनिया, हाइड्रोजन, सल्फाइड, जस्ता, निखिल एवं पारा यह सब औद्योगिक प्रक्रियाओं  से उत्पन्न विषैले पदार्थ से युक्त होते हैं।
  • यदि यह विषैला पीने वाला पानी किसी अन्य माध्यम से जैसे मछलियों को खाने के माध्यम से शरीर में पहुंचा जाए तो गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
  • इस विषय में पानी जब शरीर के अंदर जाता है तो उससे अंधापन, शरीर के अंगों को लकवा मार जाना,श्रवण क्रिया आदि जैसे बीमारी हो ना और इस पानी से कपड़ा धोने अथवा नहाने के लिए नियमित प्रयोग में लाया जाता है तो त्वचा रोग भी उत्पन्न हो सकताहै।

3.भूमि प्रदूषण (Land Pollution In Hindi)

Bhumi Pradushan Kya Hai – भूमि प्रदूषण का अर्थ है जमीन जहरीली तथा अनुपयोगी पदार्थ के भूमि में विसर्जित करना तथा जैविक रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा भूमि तथा मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित करना लोगों की भूमि के प्रति बढ़ती लापरवाही के कारण भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है ।

भूमि प्रदूषण के कारण

भूमि प्रदूषित होने के कुछ निम्न कारण है

  • जब सड़कों और बिल्डिंगों जैसे चीजों का निर्माण होता है तब भूमि पर कुछ ठोस कचरे डाले जाते हैं जो एक कारण है भूमि प्रदूषण का।
  • कृषि विभाग अर्थात खेती के समय उर्वरक रसायनों तथा कीटनाशकों का अधिक प्रयोग करना।
  • कागज तथा चीनी जैसे मिलो से निकलने वाले पदार्थ का निपटान करना भूमि पर, जो की मिट्टी द्वारा अवशोषित नहीं हो पाते।
  • प्लास्टिक जैसे थैलियों का अधिक उपयोग करना फिर उसे जमीन में दबा देना लेकिन प्लास्टिक भूमि पर गल नहीं पाती।
  • घरों, होटलों, उद्योगों इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ का निपटान करना भूमि में जिसमें प्लास्टिक,कपड़ा लकड़ी,सेरेमिक,सीमेंट आदि है जिसका भूमि में गलन  संभव नहीं है।

भूमि प्रदूषण से होने वाला प्रभाव

भूमि प्रदूषित होने की वजह से निम्नलिखित हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते हैं।

  • भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म होते जाती है जिससे कृषि योग्य भूमि की कमी होती जा रही है।
  • इसी कारणों से भोज पदार्थ भी दूषित हो जाता है जिससे खाने पर हानिकारक बीमारियां पैदा हो जाती हैं।
  • भूमि प्रदूषण के कारण भूस्खलन की भी स्थिति बनने लग गई है।

4.ध्वनि प्रदूषण (Poise Pollution In Hindi)

Dhwani Pradushan Kya Hai – ध्वनि प्रदूषण अर्थात अत्यधिक तीव्र तथा अश्विनी धोनी जो मानव के लिए हानिकारक है उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं इस ध्वनि प्रदूषण को मापने के लिए डेसीबल इकाई को बनाया गया है।

ध्वनि प्रदूषण का कारण

ध्वनि प्रदूषण कानून लिखित कारण है –

  • किसी भी त्यौहार में गांवों एवं शहरों में राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार में रैली में लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना ध्वनि प्रदूषण का कारण है।
  • अनियंत्रित वाहनों के विस्तार ओं के कारण उनके इंजनों की आवाज तथा हारने के कारण उत्पन्न ध्वनि।
  • औद्योगिक क्षेत्रों में उच्च ध्वनि क्षमता वाले पावर हवन तथा बड़ी-बड़ी मशीनों द्वारा शोर से उत्पन्न ध्वनि।
  • शादी , पार्टी आदि में उपयोग होने वाले जनरेटर एवं डीजल पंप आदि द्वारा उत्पन्न ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण के कारण में  रखा गया है।

ध्वनि प्रदूषण से होने वाला प्रभाव

  • ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव से श्रवण शक्ति का कमजोर होना तथा सिर दर्द ,चिड़चिड़ापन ,मनोवैज्ञानिक दोस जैसे भयानक समस्याओं का सामना तथा लंबे समय तक ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव से संभावित परेशानी बढ़ जाती ।
  • ध्वनि प्रदूषण से हृदय गति बढ़ जाती है जिससे वजह से रक्तचाप सिर दर्द एवं अनिद्रा जैसे अनेक भयानक रोग उत्पन्न होते हैं।
  • इस ध्वनि प्रदूषण की वजह से नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे उनकी शारीरिक विकृतियां उत्पन्न हो जाती है जैसे गैस्ट्रिक,अल्सर,दमा , थकान एवं चिड़चिड़ापन जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

5.प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution In Hindi)

बढ़ती जरूरतों के मुताबिक प्रकाश की भी जरूरत बढ़ रही है और बढ़ती टेक्नोलॉजी तथाएस्ट्रोलॉजी के लिए बिजली की मांग इस प्रकाश प्रदूषण का कारण बन सकता है आज कई ऐसी चौका देने वाली लाइटों का उपयोग हो रहा जिसका एक बार मनुष्य के आंख पर पड़ जाने के कारण वह अंधा भी हो सकता है या आंख की रोशनी कम हो सकती है।

प्रकाश प्रदूषण का कारण

इसके निम्नलिखित कारण है –

  • बढ़ते यातायातो तथा हैवी वाहनों में उपयोग होने वाली हाई वोल्ट के बल्ब का इस्तेमाल।
  • किसी भी फंक्शन कार्यक्रम में जरूरत से ज्यादा लाइटिंग, ,डेकोरेशनकरना।
  • जरूरत से ज्यादा बल्ब का उपयोग करना रूमो में ।

प्रकाश प्रदूषण से होने वाला प्रभाव निम्नलिखित है-

  • ज्यादा लाइट के कारण सिर दर्द होना।
  • लाइट लग जाने की वजह से अंधा होना।
  • गाड़ी चलाते समय आंख के आगे अंधकार छा जाना जो एक्सीडेंट का कारण बन सकता है।
  • शहरी क्षेत्रों में तारों का नाटक टीम आना या ना दिखाना इसी प्रदूषण का परिणाम है।

दोस्तों उम्मीद है आपको इस लेख में प्रदुषण से सम्बंधित सारी जानकारी मिल गयी होगी अगर ये लेख आपको पसंद आया तो इसे आप अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे ।

FAQs

प्रदुषण (Pollution) क्या है?

प्रदूषण का समान अर्थ , वायु, जल, मिट्टी आदि का अवांछित द्रव्यसे दूषित होना जिसका सजीवों पर प्रत्यक्ष से उल्टा प्रभाव पड़ता है तथा पर्यावरण में दूषण पदार्थ के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलित में पैदा होने वाले दोष अर्थात प्राकृतिक में होने वाले गंदगीया को हम प्रदूषण कहते हैं

प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution)
  • जल प्रदूषण (Water Pollution)
  • भूमि प्रदूषण (Land Pollution)
  • ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
  • प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution)

वायु प्रदुषण क्या है? (Air Pollution In Hindi)

वायु प्रदूषण अर्थात हवा में उपस्थित ऐसे अवांछित गैस धूल के कण जो मानव तथा प्राकृतिक दोनों के लिए खतरनाक हैं अर्थात खतरे का कारण बन गए हैं वायु का किसी भी कारण से दूषित हो ना वह वायु प्रदूषण कहलाता है तथा वायु में उपस्थित वाह तत्वों की उपस्थिति जो आज मानव तथा जीव जंतु दोनों के स्वास्थ्य अथवा कल्याण हेतु हानिकारक है उसे वायु प्रदूषण का नाम देते हैं और ऐसी स्थिति को वायु प्रदूषण कहते हैं ।

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