पर्यावरण संरक्षण क्या है | पर्यावरण संरक्षण के कारण और उपाय

नमस्कार दोस्तों आज हम उस विषय के बारे में जानेंगे जिसे देखकर हर मानव का मन तृप्त हो जाता है अर्थात हम पर्यावरण की बात कर रहे अगर हमारे चारों ओर देखें तो ईश्वर की बनाई गई इस अद्भुत पर्यावरण की सुंदरता देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है

पर्यावरण में उपस्थित हरे भरे वृक्ष, लताएं, प्यारे प्यारे चहचहाते पक्षी हमारे मन को शांत रखते हैं लेकिन आज मानव अपनी जरूरत और जिज्ञासा के लिए पर्यावरण में हस्तक्षेप कर नई-नई खोज कर रहे हैं जिसके कारण हमारा पर्यावरण प्रदूषित होते जा रहा है

हमें अपने परिवार एवं दोस्तों और सभी का खयाल रहता है लेकिन जब पर्यावरण की बात आती है तो बस स्वच्छ भारत अभियान, गांधी जयंती इन्हीं दिनों हमें पर्यावरण का ख्याल आता है अतः पर्यावरण को स्वच्छ रखना बहुत जरूरी है एवं हमारा कर्तव्य भी, हम इस लेख में पर्यावरण संरक्षण क्या है, इसके नुकसान, होने वाला दुष्परिणाम इसमें जुड़ी और भी जानकारी का अध्ययन करेंगे तथा इस लेख को अंत तक पढ़ें,,

पर्यावरण की परिभाषा

पर्यावरण शब्द परी + आवरण से मिलकर बना है अर्थात चारों ओर के आवरण को पर्यावरण कहा जाता है जो कुछ भी आवरण के भीतर है वह सब कुछ पर्यावरण है.।

पर्यावरण संरक्षण की परिभाषा

पर्यावरण संरक्षण से तात्पर्य है कि हमारे चारों ओर के आवरण (वातावरण)में उपस्थित गंदगी जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है उसे सुरक्षित करना पर्यावरण संरक्षण कहलाता है अर्थात किसी भी वस्तु को बर्बाद होने से बचाना संरक्षण कहलाता है.।

पर्यावरण संरक्षण क्या है ?

सन 1947 में हमारा भारत देश आजाद होने के बाद हमारे संविधान को लागू होने में 3 साल का समय लगा था अर्थात 1950 में संविधान लागू हुआ था परंतु उस संविधान में पर्यावरण संरक्षण के बारे में उल्लेख ना था, ना ही अच्छे से पर्यावरण संरक्षण को संविधान से जोड़ा गया था तब सन 1972 में “स्टॉकहोम सम्मेलन” हुआ तब भारत सरकार का ध्यान पर्यावरण की ओर गया कि पर्यावरण संरक्षण को संविधान में लिखित होना चाहिए

तब इस मुद्दे को सन 1976 में संविधान में संशोधन कर, नया अनुच्छेद जोड़ा गया   जो 48A तथा 51A (G)  है जिसमें 48A में सरकार को निर्देश देता है कि उन्हें पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिए और वह इसके जवाबदार हैं और उनमें वह सुधार का काम करें तथा अनुच्छेद 51A (G) नागरिकों के लिए है जिसमें नागरिकों द्वारा पर्यावरण की सुरक्षा करने का विषय है तब से आज तक इस संविधान में कोई अन्य संशोधन पर्यावरण संरक्षण को लेकर नहीं हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ प्रकार

  • वायु प्रदूषण
  • जल प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण
  • रेडियोधर्मी प्रदूषण
  • प्रकाश प्रदूषण
  • भूमि प्रदूषण

यह सभी पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारक है यदि हमें अपने पर्यावरण को संरक्षित रखने के विषय में सोचना है तो हमें इन सभी कारकों पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा तथा इन सभी को समझ कर इनको रोकने का प्रयास करना होगा तभी हम पर्यावरण का संरक्षण कर पाएंगे ।

पर्यावरण पर इन प्रदूषण का घातक प्रभाव

1.आज इस आधुनिक काल में पूरा संसार ही इस पर्यावरण प्रदूषण से पीड़ित है आज यदि मनुष्य सांस भी लेता है तो उसे शुद्ध ऑक्सीजन नहीं मिल पाता उसमें भी कुछ जहरीली गैस मिली होती है और इस प्रदूषण के कारण हम मजबूर हैं जहरीली सांस लेने में यह जहरीली गैस जब हमारे शरीर में प्रवेश करती है तब हमारे शरीर में कई हानिकारक बैक्टीरिया उत्पन्न हो चाहते हैं जो हमें स्वस्थ रहने से रोकते हैं

जिससे शरीर में बीमारियां विकसित होने लगती है और यदि पर्यावरण इसी प्रकार प्रदूषित होता रहा तो पृथ्वी पर रहने वाले सभी लोग जिसमें जीव जंतु, प्राणी आदि सभी नष्ट हो जाएंगे आज तरह-तरह के नई बीमारियां जन्म ले रही है इसका भी कारण प्रदूषण है।

आज अभी इस समय कोविड एक भयानक महामारी के रूप में सामने खड़ी है जिससे पूरा भारत देश तथा अन्य सभी देश इससे लड़ रहे हैं कितनों की इस महामारी से जान भी जा चुकी है यह महामारी भी कहीं ना कहीं प्रदूषण से जुड़ी हुई है  प्रदूषण भी इसके कारण के रूप में देखा जा सकता है

2. इसका दूसरा बड़ा कारण विज्ञान के क्षेत्र में असीमित प्रगति अर्थात आज वैज्ञानिक आविष्कारों को इतना महत्व दे रहा है जो कि दुष्परिणाम का कारण साबित हो रहा अविष्कारों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है कई तरीकों के रासायनिक प्रयोग वैज्ञानिक द्वारा वातावरण में किए जाते हैं कई अन्य केमिकल का परीक्षण होता है यह सब भी पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।

3. इसका तीसरा कारण जनसंख्या विस्फोट भी है जनसंख्या की वृद्धि अनियमित रूप से बढ़ती ही जा रही जिसके कारण सभी वस्तुओं का दोहरा उपयोग हो रहा तो प्रदूषण और तेजी गति से बढ़ेगा यह भी बहुत बड़ा कारक है पर्यावरण प्रदूषण का ।

4.औद्योगीकरण और शहरीकरण अर्थात इसका मतलब यह है जिस मे मानव द्वारा अपनी जरूरत के हिसाब से पर्यावरण को तथा हरे भरे पेड़ पौधों को नष्ट करते जाना जिससे वह अपना उद्योग तथा अपना घर उसी स्थान पर बना सके प्रगति के इस दौर में मनुष्य इतना अंधा हो चुका है कि उसे अपने सुख सुविधा के अलावा कुछ भी नहीं दिखता वह कुछ भी करने को तैयार है।

हमें इन सभी खतरनाक बीमारियों से बचने के लिए हमें पर्यावरण को सुरक्षित रखने की सख्त आवश्यकता है हम सब के साथ हो रही बीमारी महामारी कहीं भयानक रूप न ले ले इससे बचने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण अति आवश्यक है

पर्यावरण का संरक्षण कैसे किया जा सकता है?

हमारे पर्यावरण प्रदूषण में कुछ ऐसे दुष्प्रभाव वाले घटक है जैसे आणविक विस्पोट, वायुमंडल का तापमान बढ़ना, ओजोन परत की छाती, आदि ऐसे घातक दुष्प्रभाव हैं इन सबके अलावा जल, पर्यावरण का विनाश या दूषित होना मानव को अनेक रोगों से अवगत कराता हैं अतः इसे पर्यावरण को संरक्षित रखने की विधि कुछ निम्न है ।

1.हमें अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सर्वप्रथम जल को प्रदूषण से बचाना होगा इसमें कारखानों से निकला गंदा पानी, घरेलू उपयोगी पानी, नालियों में पानी के साथ प्रवाहित मल,सीवरलाइन का गंदा पानी इन सभी गंदे पानी को नदी, तालाबों में समाहित होने से रोकना होगा क्योंकि कारखानों के पानी में बहुत सारे हानिकारक विषैले पदार्थ मिले होते हैं और यह पानी जब नदी तालाब में छोड़ दिया जाता है तब पानी में मौजूद जल जीवों की मृत्यु हो जाती है तथा इसका पानी विषाक्त हो जाता है जो पीने योग्य नहीं रह जाता

जिस भी किसान भाइयों का यह सिंचाई का माध्यम होता है उस पर भी बुरा असर पड़ता है फिर उसके उपजाऊ भूमि भी विषयली तथा उसे भूमि से उगने वाली फसलें और सब्जियां भी पोस्टिक तत्वों से रहित रहेंगी जिसे हम सेवन के रूप में लेंगे तो हमारे शरीर में उपस्थित खून भी विषैला हो जाएगा जो एक बीमारी का कारण है जो बाद में एक भयानक महामारी और बीमारी का रूप ले सकती है अर्थात कहने का तात्पर्य यह है कि हमें अपने कल को स्वस्थ देखना है तो जरूरी है जागरूकता की, हमें बच्चों को पर्यावरण सुरक्षा के बारे में समय-समय पर बताते रहना चाहिए।

2.वायु प्रदूषण को भी सुरक्षित रखना जरूरी है यह भी एक चिंता का विषय है आज मानव अपनी जरूरतों के लिए कई मशीनों ईंधन का प्रयोग करता है वही बड़े बड़े कारखानों में लगी चिमनीया से लगातार निकलने वाला धुआं व डीजल,पेट्रोल से चलने वाले वाहन तथा इनवाइटर,जनरेटर आदि के माध्यम से निकला धुआं तथा गैसे जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड,नाइट्रोजन,सल्फ्यूरिकएसिड,नाइट्रिकएसिड घुला होता है

यह सब पृथ्वी के वायुमंडल में जाकर जम जाते हैं जो कि शुद्ध जल को विषैला तथा धरातल में तापमान में वृद्धि का कारण बनते जा रहा हैं जिसके कारण मानव को कई बीमारी जैसे सिर दर्द,चिड़चिड़ापन, चक्कर, कमजोरी आदि का सामना करना पड़ रहा है इसे कम करने का बस यही उपाय है कि हमें कम से कम यातायातओं का उपयोग करना चाहिए और वायु के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना वृक्षारोपण का बढ़ावा देना होगा।

3.जितना जरूरी जल और वायु है उतना ही जरूरी हमें ध्वनि प्रदूषण को कम करना है क्योंकि देखा जाए तो हमारा भविष्य पर्यावरण पर आधारित है लेकिन आज लोग हल्ला करना ज्यादा पसंद करते हैं यदि घर में बच्चे का जन्म हुआ शादी, पार्टी है या कोई भी कार्यक्रम इन सभी कार्यक्रमों में डी.जे को बड़ा महत्व दिया जाता है डीजे आवश्यकता समझी जाती है

इसके साथ साथ गांव के विकास के लिए गांवों को शहर से जोड़ा गया है तब गाड़ियों की चिल्लाहट को शहर महानगरों में शोर मचाती फिरती है इसके अलावा औद्योगिक संस्थाओं ने इस को बढ़ावा दिया है ध्वनि प्रदूषण से मानव के मस्तिष्क पर बुरा वाघातक प्रभाव पड़ता है पागल जैसी स्थिति भी बन सकती है अतः इसे भी कंट्रोल करने की सख्त आवश्यकता है।

ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण जाति का प्रदूषण बहुत ही हानिकारक होते हैं और यह हमारे आने वाली पीढ़ी को प्रभावित कर रहे हैं इसका असर बच्चों में ज्यादा पड़ रहा है इसलिए हमें जागरूकता की आवश्यकता है इन्हीं सब को देखते हुए 5 जून को समस्त विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जाता है यदि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए थोड़ा सा भी प्रयास किया जाए तो इससे बचा जा सकता है सभी जंगलों वा पहाड़ों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए लकड़ी को काटने में रोक लगाई जाए।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय

पर्यावरण को शिक्षा के प्रथम पाठ में रखा जाना चाहिए जिससे बच्चे इसे पहले से ही समझ जाएं अतः पर्यावरण संरक्षण करने के लिए उपाय निम्नलिखित है।

  1. सरकार द्वारा चलाई जा रही मुहिम जिसमें पर वृक्षारोपण को प्रथम में रखा गया है इस पर हर साल कम से कम एक पेड़ लगाकर और उसकी देखभाल कर पूर्ण वृक्ष बनाएं तथा अपनी देश में जन भागीदारी निभाएं।
  2. सरकार द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छ भारत अभियान जिसमें आसपास के वातावरण कोसाफरखना , सड़कों में कचरा ना फेंकना इसमें सख्त कानून बनाए जाएं।
  3. नदी तालाबों में कूड़ा ना फेंके यह कूड़ा नदी तालाब में जाकर पानी को गंदा करता है।
  4. हमें कपड़ों से बने थैले का उपयोग करना चाहिए प्लास्टिक का उपयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए।
  5. हमें यातायातओं का कम से कम उपयोग करना चाहिए हो सके तो स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए साइकिल चलानी चाहिए।
  6. बिजली के उपकरणों को समय पर ही प्रयोग में लेना चाहिए अन्यथा कम इस्तेमाल करें।
  7. हमें ऐसे सामानों को प्रयोग में लेना चाहिए जिसका दुबारा उपयोग किया जा सके अर्थात रिसाइकल किया जा सके।
  8. ऊर्जा की खपत को कम करने के लिए हमें सूर्य की रोशनी का सहारा लेना चाहिए।
  9. हमें घरों में उतने ही सामानों का भंडारण करना चाहिए इतना की आवश्यकता हो।
  10. वैज्ञानिक द्वारा सुविधाजनक यंत्रों का उपयोग अधिक आवश्यकता पड़ने पर ही करना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986

इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह है जिसमें पर्यावरण का संरक्षण और पर्यावरण में हो रहे प्रदूषण को सुधारने के लिए तथा इससे संबंधित सभी विषयों पर आधारित अधिनियम है यह अधिनियम सन 1986 में लागू हुआ था

इस अधिनियम का विस्तार संपूर्ण भारत में है अर्थात यह अधिनियम भारत देश के लिए पारित किया गया 23 मई 1986 में इस अधिनियम को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति दे दी गई थी लेकिन इस अधिनियम को भारत में लागू 19 नवंबर 1986 में किया गया था। अगर देखा जाए तो पर्यावरण सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए हमारे वेद पुराणों अर्थात प्राचीन काल में भी इसका उल्लेख है पर्यावरण संरक्षण के ऊपर चर्चा प्राचीन काल से ही चल रही है इसके बाद ब्रिटिश काल में “वनों के संरक्षण” के लिए भी अधिनियम पारित हुआ

इस अधिनियम को सन 1927 में पारित किया गया था इसके बाद सन् 1972 में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में “मानव पर्यावरण सम्मेलन” का आयोजन हुआ था जिसे “स्टॉकहोम सम्मेलन” भी कहते हैं इसके पश्चात सन 1984 में एक ऐसा हादसा हुआ मध्यप्रदेश में, जो बहुत ही भयानक साबित हुआ हम भोपाल गैस कांड की बात कर रहे इसमें एक गोदाम में मिथाइल आइसोसायनाइड गैस (MIC GAS) के लीक हो जाने की वजह से कई मासूमों की जान चली गई थी तत्पश्चात 1986 में इस पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 को पारित किया गया इस अधिनियम में कुल 4 अध्याय तथा 26 धाराएं हैं जिसके बारे में हम अन्य लेख के माध्यम से जानेंगे।

पर्यावरण संरक्षण का महत्व

पर्यावरण संरक्षण का संबंध धरती में रह रहे सभी प्राणियों व समस्त प्राकृतिक परिवेश से है प्रदूषण के कारण पूरी पृथ्वी दूषित होते जा रही इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए 1992 में ब्राजील में विश्व के 174 देशों को इकट्ठा कर “पृथ्वीसम्मेलन” का आयोजन किया गया यह पर्यावरण संरक्षण के लिए पहली सभा थी.।

इसके बाद दूसरी सभा सन 2002 में जोहान्सवर्ग नामक देश में फिर से यह “पृथ्वी सम्मेलन” का आयोजन किया गया विश्व में पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने का मुद्दा था तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मेलन में अनेक सुझाव दिए गए साथ मे यह भी बताया गया कि यदि पर्यावरण संरक्षित रहेगा तभी धरती पर जीवन संभव रह पाएगा अन्यथा मंगल, बुध और अन्य ग्रहों की तरह पृथ्वी का भी जीवन चक्र खत्म हो जाएगा।

हमारे द्वारा प्रस्तुत किया गया पर्यावरण संरक्षण के ऊपर यह आर्टिकल आप को पढ़कर कैसा लगा हमें कमेंटबॉक्स पर जरूर बताएं ,,

धन्यवाद।।

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