महाद्वीप और महासागर के नाम | All Continents & Oceans Names in the World | Mahadweep Aur Mahasagar Ke Naam

नमस्कार दोस्तों आज हम महाद्वीप और महासागर संबंधित संपूर्ण जानकारी का अध्ययन करेंगे इसलिए को ध्यान से पढ़ें इसमें नॉलेज वाली कई ऐसी बातें हैं जो आपको कंपटीशन एग्जाम में पूछे गए प्रश्न तथा सामान्य ज्ञान में मददगार होंगी।

महाद्वीप क्या है ?

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Mahadweep Aur Mahasagar Ke Naam

महाद्वीप– महाद्वीप अर्थात विस्तृत जमीन का फैलना होता है जिससे देखे जाने पर यह पृथ्वी पर समुद्र से बिल्कुल अलग दिखाई देता है और वैज्ञानिक द्वारा अलग-अलग संभावनाओं से इसकी परिभाषा दी जा रही है क्योंकि इसे व्यक्त करने का कोई मापदंड नहीं है।

लेकिन आमतौर पर जाना जाए तो महाद्वीप धरती का बहुत बड़ा और विस्तृत क्षेत्र होता है जिसकी सीमा निश्चित पहचानी जा सकती है पृथ्वी पर इसका बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है और यदि देखा जाए तो अभी यह तय कर पाना कि पृथ्वी पर कितने महाद्वीप हैं यह भी सुनिश्चित नहीं हुआ है इस बात पर पूर्ण सहमति नहीं मिली है कि पृथ्वी पर कितने महाद्वीप हैं

कुछ देश या वैज्ञानिक सिर्फ चार या पांच महादीप ही स्वीकार करते हैं लेकिन अधिकतर लोग इसे 6 या 7 होने की बात करते हैं भू- वैज्ञानिकों के  पास दो मतभेद है जैसे कि पहला तो यह कि यूरोप और एशिया को क्या अलग-अलग महाद्वीप माने या इन दोनों को मिलाकर यूरेशिया माने तथा दूसरा सबसे बड़ा मत कि उत्तर अमेरिका और दक्षिण अमेरिका को अलग-अलग महाद्वीप माने या दोनों को मिलाकर एक बड़ा महाद्वीप अमेरिका माने इन सबके चलते अभी इस बात पर रिसर्च कायम है इसलिए कुछ सुनिश्चित हो कर नहीं कहा जा सकता।

महाद्वीप कितने हैं ?

यदि आम तौर पर देखा जाए तो महाद्वीप 7 ही है भूवैज्ञानिक अभी इसकी संख्या निश्चित तौर पर नहीं बता पाए हैं लेकिन सब के मुताबिक हम इसे साथ  की संख्या में मानते हैं जो निम्न है-

महाद्वीप के नाम

  1. एशिया महाद्वीप।
  2. अफ्रीका महाद्वीप।
  3. उत्तरी अमेरिका महाद्वीप।
  4. दक्षिण अमेरिका महाद्वीप।
  5. अंटार्कटिका महाद्वीप।
  6. यूरोप महाद्वीप।
  7. ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप।

एशिया महाद्वीप – एशिया महाद्वीप दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है जो सबसे विशाल तथा सार्वजनिक धन संख्या वाला महाद्वीप है जो पूरी दुनिया के लगभग 30% भाग को घेरे हुआ है और जनसंख्या में यह दुनिया की लगभग 60% आबादी निवास करती है जिस में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश चीनी तथा उसके बाद भारत शामिल है इस एशिया महाद्वीप में ही विश्व का सबसे बड़ा एवं सर्वोच्च पर्वत विद्वान है जिसका नाम हिमालय पर्वत है इस महाद्वीप में विश्व की लंबी झील कैस्पियन सागर तथा विश्व की सबसे गहरी झील बैकाल झील स्थित है।

अफ्रीका महाद्वीप– अफ्रीका महाद्वीप एशिया के बाद दूसरा स्थान पर आने वाला महाद्वीप है यह विश्व का सबसे गर्म माने जाने वाला स्थान है तथा सभी महाद्वीप से ज्यादा गर्म और यहां पर अल अजीजी उपस्थित है जो लीबिया में स्थित है यह महाद्वीप जिब्राल्टर नदी से यूरोप महाद्वीप से विभक्त होता है तथा इसे पिछड़ा हुआ महाद्वीप कहते हैं क्योंकि अभी यह सभी महाद्वीपों के मुकाबले इसका विकास धीमी गति से हो रहा है इस महाद्वीप में जातियां तथा जनजातियां निवास करती है और यहां पास शीतोषण घास के मैदान एवं पोषण घास के मैदान पाए जाते हैं जिसे सवाना वह वर्ल्ड कहा जाता है इसमें विश्व का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा मरुस्थल यहीं पर है ।

उत्तरी अमेरिका– इस महाद्वीप की खोज कोलंबस द्वारा सन 1492 एडी  में हुई थी यह दुनिया का तीसरा बड़ा महाद्वीप है जिसका क्षेत्रफल 24255000 स्क्वायर किलोमीटर है जिसके अंदर 26 देश जुड़े हुए हैं उत्तर अमेरिका में सर्वोच्च शिखर वाला माउंट  मैकिनले है जो कि अलास्का में स्थित है इस महाद्वीपों में विश्व के सबसे तेज बहने वाली झील  सुपीरियर झील स्थित है तथा विश्व में सर्वाधिक सोयाबीन और मक्का उत्पादित मादी भी माना जाता है जो इस महाद्वीप की शान है।

दक्षिण अमेरिका – उत्तरी अमेरिका के बाद दक्षिण अमेरिका चौथे नंबर का सबसे बड़ा महाद्वीप माना जाता है जिसके अंतर्गत 15 देश आते हैं जिसका क्षेत्रफल 17798500 वर्ग किलोमीटर है इस महाद्वीप में ब्राजील में उपस्थित सबसे विशाल शहर जिसका नाम रियो डी जेनेरो है तथा यह विश्व का सर्वाधिक कोको उत्पादक करने वाला देश भी माना जाता है और ब्राजील विश्व में तीसरे स्थान पर मैग्नीस उत्पाद करता है यहां पर विश्व की सबसे ऊंची झील  टीटी – काका उपस्थित है इस महाद्वीप में सबसे ऊंचा ज्वालामुखी ओजस –डेल – सुलादो जोकि चिल्ली अर्जेंटीना में उपस्थित है।

अंटार्कटिका महाद्वीप – यह पांचवा सबसे बड़ा महाद्वीप है तथा यहसबसे शुष्क एवं ठंडा महाद्वीप है इस का परिमाप 14,000,000 वर्ग किलोमीटर है यह महाद्वीप इतना ठंडा एवं शुष्क है कि यहां पर मानव का निवास करना बिल्कुल ना के बराबर है इसका 98 प्रतिशत भाग बर्फ से घिरा हुआ है।

यूरोप महाद्वीप – यूरोप महाद्वीप अंटार्टिका के बाद छठवां महाद्वीप है जिसमें 46 देश विद्यमान हैकाकेशस पर्वत यूरोप महाद्वीप को एशिया महाद्वीप से जोड़ता है इस महाद्वीप का सबसे ऊंचा शिखर एलबुर्ज पर्वत जो रूस में स्थित है यह 5642 मीटर ऊंचा हैयूरोप महाद्वीप मैंसबसे बड़ा शहर लंदन है जो थेम्स नदी के किनारे स्थित है इसके अलावा कुछ जाने-माने शहर जैसे फ्रांस ,इटली ,नीदरलैंड फिनलैंड, स्विजरलैंड एवं यूक्रेन आदि देश एवं नगर सम्मिलित है।

ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप – विश्व का सबसे छोटा कहां जाने वाला महाद्वीप सातवां महाद्वीप ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप है जिसमें 22 देश विद्यमान है तथा जो 8600000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है इस महाद्वीप का सर्वोच्च शिखर कोस्यूसको है जो 2228 मीटर ऊंचा है इस महाद्वीप में प्राकृतिक द्वारा निर्मित कुछ ऐसे ऐसे सुंदर कलाकृतियां हैं जो अद्भुत मानी जाती हैं इसलिए इस महाद्वीप को प्राकृतिक सुंदर ता के लिए भी जाना जाता है।

महासागर क्या होता है ?

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Mahadweep Aur Mahasagar Ke Naam

खास तौर पर महासागर जलमंडल का एक प्रमुख भाग है यह आपस में ही एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और देखा जाए तो महासागरीय जल हमेशा गतिशील रहता है अर्थात चलता रहता है महासागर के मुख्य तीन गतियां है जैसे तरंगे ,ज्वार भाटा तथा महासागरीय धारा तथा महासागर खारे पानी का एक विशाल क्षेत्र है जो कि पृथ्वी का 96.6 भाग अपने आप से ढके रहता है लगभग 36.1 करोड वर्ग फिट तथा संपूर्ण भाग से आधा भाग लगभग 3000 मीटर गहरा है।

महासागर कितने हैं ? Oceans of the World

आज हमारे विश्व में पांच महासागर विद्यमान है जिसे हम निम्नलिखित तरीकों से जानेंगे-

  1. प्रशांत महासागर
  2. अटलांटिक महासागर
  3. हिंद महासागर
  4. दक्षिण ध्रुव महासागर
  5. उत्तर ध्रुव महासागर

प्रशांत महासागर – यह महासागर में भूभाग बहुत ही कम या ना के बराबर है यह महासागर सबसे बड़ा और गहरा महासागर माना जाता है यह धरती में 30% भाग में फैला हुआ है जिसकी संरचना एक त्रिभुजाकार है इसका क्षेत्रफल 16,18,00,000 वर्ग किलोमीटर अर्थात अटलांटिक महासागर से दुगने से थोड़ा कम माना जाता है अगर इसकी गहराई की बात की जाए तो यह लगभग 4000 मीटर गहरा और अधिकतम गहराई लगभग 11000 मीटर है इसमें अन्य सागर से दोगुने पानी समाया हुआ है

यदि हम प्रशांत महासागर के नाम की बात करें तो हर नाम के पीछे कोई ना कोई राज्य अर्थ जरूर होता है ठीक उसी प्रकार प्रशांत महासागर के नाम  का भी एक अर्थ है प्रशांत महासागर का नाम प्रशांत इसलिए पड़ा क्योंकि यह अटलांटिक महासागर की तुलना में काफी शांत दिखने वाला महासागर है इसका नाम मैगलन ने पुर्तगाली अन्वेषक मेरा रखा था जब मैगलन तूफानी अटलांटिक महासागर को पार कर प्रशांत महासागर में पहुंचा तब उसे प्रशांत महासागर का जल अटलांटिक महासागर की तुलना में काफी शांत दिखाई पड़ा था उसी समय से मैगलन द्वारा रखा गया नाम प्रशांत आज प्रशांत महासागर के नाम से जाना जाता है।

अटलांटिक महासागर – यह प्रशांत के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महासागर है इसका क्षेत्रफल 10,64,00,000 वर्ग किलोमीटर है इसका आकार 8 की आकृति में है या यूरोप तथा अमेरिका महाद्वीप को दुनिया के बाकीमहाद्वीप से अलग करता है अंध महासागर की औसत गहराई देखी जाए तो लगभग 3339 मीटर है जब समुद्र इसके साथ लगा रहे तब यदि इस समुद्रों को अलग कर देखा जाए तो इसकी औसत गहराई 3926 मीटर है यदि इस के नामकरण की बात करें तो इसका नाम ग्रीक  संस्कृत के नाम से पड़ा जिसका अर्थ होता है ‘नक्शे का समुद्रा’ तथा दूसरी मान्यता के अनुसार इसका नाम अंग्रेजी में अटलांटिक है तो इसका नाम यूनानी देवता ‘एटलस’ के नाम पर रखा गया।

हिंद महासागर – विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर माना जाता है तथा इस महासागर को युवा महासागर भी कहा जाता है क्योंकि इसको बनने ज्यादा दिन नहीं बल्कि 73.6 करोड़ वर्ष पहले ही बना है धरती के कुल क्षेत्रफल का सिर्फ 7% हिस्सा ही हिंद महासागर से घिरा हुआ है तथा इसका क्षेत्रफल 7,35,56,000 वर्ग किलोमीटर है इस महासागर की औसत गहराई 3890 मीटर है और सबसे अधिकतम  गहराई इसकी 8047 मीटर है इसके नाम करण की बात करें तो यह विश्व का एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है वह देश का नाम है हिंदुस्तानयदि संस्कृत और अन्य ग्रंथों में देखें तो इसे रत्नाकर कहकर बुलाया गया है जिस का संधि विच्छेद में अर्थ होता है रत्न उत्पन्न करने वाला तथा हिंदू ग्रंथों में इसे हिंद महासागर के नाम से जाना जाता है।

दक्षिण ध्रुव महासागर – यह महासागर चौथा सबसे बड़ा महासागर माना जाता है यदि देखा जाए तो दुनिया का 70% ताजे पानी का हिस्सा इस महासागर में बर्फ के रूप में जमा हुआ है इस महासागर का क्षेत्रफल 14 करोड वर्ग किलोमीटर है इसे बर्फ का रेगिस्तान भी कहा जाता है और इस महासागर में बर्फ इतनी ज्यादा है कि यहां पर इस महासागर की गहराई का पता लगा पाना अत्यंत मुश्किल है यहां पर 1.9 किलोमीटर मोटी बर्फ की परत जमी हुई है यदि इस महासागर का नामांतरण की बात की जाए तो इस महासागर के दक्षिण ध्रुव में स्थित होने के कारण इसका नाम दक्षिण ध्रुव महासागर पड़ा है तथा यह सबसे ठंडा महासागर से भी जाना जाता है।

उत्तरी ध्रुव महासागर -उत्तरी ध्रुव महासागर सभी महासागर में से सबसे छोटा महासागर एवं पुतला महासागर के नाम से जाने जाने वाला महासागर है इस महासागर का क्षेत्रफल 14060000 वर्ग किलोमीटर है जो दक्षिण दोगी महासागर के बराबर है इस महासागर की अधिकतम गहराई 5450 मीटर है और वही इसकी औसत गहराई 1038 मीटर है और इसका नामांतरण देखें तो यह उत्तरी ध्रुव में स्थित होने के कारण इस महासागर को उत्तरी ध्रुव महासागर कहा जाता है अंतरराष्ट्रीय जल सर्वेक्षण संगठन इसको एक महासागर राजवीर करते हैं जब की कुछ महासागर विज्ञानिक इसे आर्कटिक महासागर कहते हैं और इसे अंध महासागर के भूमध्य सागर ओं में से एक मानते हैं तथा यह महासागर साल भर समुद्री वर्षा से ढका रहता है ।

महासागर तथा महाद्वीपों की उत्पत्ति.

यदि हम महाद्वीप और महासागर की उत्पत्ति की बात करते हैं तो यह दोनों विश्व के दो प्रमुख भौगोलिक घटक हैं जिन्हें पृथ्वी के प्रथम में श्रेणी में रखते हैं तथा इसे उच्च वास माना जाता है पृथ्वी में 70 दशमलव 8 प्रतिशत जल की मात्रा है तथा शेष बचा 29.2% भाग पर स्थल का फैलाव है संपूर्ण पृथ्वी का क्षेत्रफल लगभग 50.995 करोड़ वर्ग किलोमीटर है जिसमें से 36.106 करोड वर्ग किलोमीटर पर जल का विस्तार है और शेष 14.889 करोड़ वर्ग किलोमीटर पर स्थल मंडल उपस्थित है इसमें गोलार्ध की बात करें तो पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में स्थलमंडल का फैलाव है जबकि दक्षिण गोलार्ध में जल मंडल की अधिकता है इसी हिसाब से उतरी गोलार्ध को स्थलीय तथा दक्षिणी गोलार्ध को जलमंडल की संज्ञा दी जाती है।

हेन्स के अनुसार महाद्वीप तथा महासागर विभिन्न प्लेट के ऊपर स्थित है और इसके ऊपर होने की वजह से जब यह प्लेट प्रवाहित होती है तो उनके साथ महादीप तथा महासागरीय वाली तली भी विस्थापित हो जाती है कार्बोनिफरस युग पैसिन्या के विभिन्न प्लेटों के ट्रांसफर तथा चलने के कारण ही वर्तमान महाद्वीप तथा महासागर का रूप प्राप्त हुआ।

वेगनर के अनुसार वेगनर जर्मनी देश का एक वैज्ञानिक था वैगनआर के सन 1912 में अपनी पुस्तक महाद्वीप तथा महासागर किताब में कठिन जर्मनी भाषा में अपने सिद्धांत का उल्लेख किया है तथा फिर 19 सौ 24 में वैगनआर ने अपने सिद्धांतों वाली किताब का अंग्रेजी में अनुवाद करके पुनः प्रकाशित किया इसके अनुसार 30 करोड वर्ष पूर्व संपूर्ण महाद्वीप भाग आपस में इकट्ठे होकर एक गेंद की भांति चिपक जाते हैं तथा दक्षिण ध्रुव के निकट स्थित हो जाते हैं जिसे पैन्जिया नाम दिया गयावेगनर के सिद्धांत के अनुसार गेंद एक विशालकायपैन्जिया है और उसके दोनों भागों तथा उसके बीच बेहतर सागर को नाम दिया।।

धन्यवाद हमने इस लेख के माध्यम से आपको संपूर्ण जानकारी देनी चाहिए यदि इस लेख में कोई भी त्रुटि हो तो हमें इस बात का खेद रहेगा तथा आगे इसी तरह के नॉलेजेबल टॉपिक पढ़ने के लिए हमारे द्वारा प्रस्तुत किए गए आर्टिकल को जरूर पढ़ें धन्यवाद।।।।

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