IPO Kya Hota Hai , IPO कैसे खरीदें।

IPO क्या होता है
IPO kya hota hai?

IPO Kya Hota Hai? ये सवाल आपके मन में जरूर आते होंगे या पिछले कुछ महीनो या दिनो सें IPO का नाम तो बहुत हीं बार सुना होगा। IPO Share Market में आता है और बहुत बड़ी-बड़ी Companies Future में IPO को लाने वाली है। लेकिन क्या आपको पता है IPO का मतलब क्या होता है,Companies IPO क्यों निकालती है। IPO कैसे खरीदें, IPO के Advantages क्या होते हैं और IPO के क्या Disadvantages होते हैं। IPO लाने के लिये Company को क्या-क्या Process Follow करना होता है। आज हम इस Article में इन सब चीजों के बारे मे पूरे Detail में बात करने वाले हैं। तो चलिये शुरु करते हैं…

IPO Kya Hota Hai?

IPO का Full Form होता है Initial Public Offering Process In Share Market. जब कोई Private Company Share Market में listed होती है और अपने Shares को पहली बार बेचने जाती है तो वो होता है IPO. IPO को निकालने के बाद कोई Company Private नहीं रहती है वो Public बन जाती है क्योंकि अब उसमें Public का भी पैसा लगा होता है (उसमे अब Public के Decissions भी आते हैं) आसान भाषा में बोला जाए तो जब कोई Company अपने Shares को Public में पहली बार बेचती है तो इस Process को IPO कहा जाता है।

Company IPO को क्यों निकालती है?

बहुत सी Company अपने IPO को Issue करती है लेकिन क्या आपको पता है कि Companies IPO क्यों issue करती है। इसके पीछे बहुत से कारण होते हैं। जब कोई Company बनती है तो उस Company में उसके Promoters,Family Members या Company के अन्य लोग जो Company सें जुड़े होते हैं पैसे डालते हैं इन सबसे मिलकर एक Company बनती है।

लेकिन जब Company आगे जाती है और अपने Business को और Extend करना चाहती है तो उसे पैसों की जरुरत पड़ती है तो वो बहुत तरीकों से पैसों का इंतजाम कर सकती है जैसे Bank से Loan लेकर या किसी पूंजीपति से पैसे लेकर लेकिन उस Loan(पैसे) पर उन्हें Interest भी देना होगा इससे उन्हे loss भी हो सकता है,फिर Company IPO लाने के बारे में सोचती है।

IPO लाने के लिये Company Share Market में listed होती है उसके बाद अपने Shares को IPO के सहारे Public में बेच देती है इससे Company की हिस्सेदारी लोगों में बंट जाती है और लोग अपना पैसा Company को देते हैं और उतने उस Company के Shares खरीदते हैं और उतने Percent के Owner बन जाते हैं।

तो इससे Company को ये फायदा होता है कि उनके पास पैसे भी आ जाते हैं और Business extend करने के लिये किसी Bank से Loan भी नहीं लेना पड़ता है,लेकिन इससे एक बात होती कि Company की हिस्सेदारी कम हो जाती है।

सीधे शब्दों में कहा जाये तो Company अपने Business को आगे लेकर जाने के लिये Public से IPO के through पैसा Collect करती है और अपनी Company में उतने Percent की हिस्सेदारी दे देती है। तो अब आपको समझ आ गया होगा कि कोई Company IPO क्यों लाती है।

IPO के लिये Company को क्या Process Follow करना होता है ?

दोस्तों अब हम IPO के बारे में बहुत सारी बातें जान चुके हैं। अब हम आपको Detail में बताने वाले हैं कि  एक IPO Launch करने या लाने के लिये एक Company को कौन-कौन सा Process Follow करना होता है।

सबसे पहले किसी भी Company को अगर IPO Launch करना होगा तो उसे Investment Bank के पास जाना पडेगा। Investment Bank आपके IPO की हर Information लेता है जैसे कि कितनी Amount Company को चाहिए और Company की Current State क्या है और इन सब Information को Analysis करेगा और उसके बाद एक Agreement पर Sign किया जाता है कि  इस IPO के Process में कितना Amount Raise होगा उसके बाद Investment Bank इन सब Services के लिये Company को कितना Charge करेगा ये सब Fix होता है।

उसके बाद जब एक Draft Prospects Ready हो जायेगा और Company उससे Satisfied हो तब उस Prospects को Review करने के लिए  SEBI (Securities And Exchange Board Of India ) में भेजा जाता है।

एक Company को IPO Launch करने से 30 दिन पहले SEBI के पास Draft Prospect भेजना होता है। एक Draft Prospect तभी भेजा जाता है,जब एक Company को 50 लाख से ज्यादा पैसे Raise करने हों।

उसके बाद SEBI आपके Draft Prospect को Review करेगा और अगर सब उस Prospector में SEBI के अनुसार है तो वो उस Prospector को Public Review के लिये अपने Website पर डालेगा और अगर आपका Draft Prospector SEBI के Guidelines को Follow नहीं  करता तो वो आपको उसमें Correction करने के लिये 30 दिन देगा और उसमें Correction करके उसे दोबारा Submit करने का Suggestion देगा।

उसके बाद जब SEBI में आपका Draft Prospector Submit हो जायेगा उसी Time पर आप अपने Company के Shares को Stock Exchange पर List करने की Application डाल सकते हैं।

India में 2 Main Stocks Exchange हैं:- NSE और BSE. अगर आपको NSE पर Register होना है तो आपको 2 Conditions पूरे करने होंगे। पहला:- आपके Company की Paid Capital कम-से-कम 10 करोड़ होनी चाहिए और दूसरी Requirement है कि  Applicant Equity कम-से-कम 25 करोड़ होनी चाहिए।

IPO के Launch का अगला Step है Road Show Lauch of IPO. जब आपका Draft Prospector SEBI में Submit हो जाता है तो Company IPO को Promotion करने के लिये Eligible हो जाती है। Company अपनी Marketing और Advertising, Marketing Agencies की मदद से करवाती है।

ये सभी Marketing Agencies SEBI से Regulated होती है। इस पूरे Promotion के Process को Road Show Promotion बोला जाता है

इसके बाद की Step होती है:- Deciding the Share Price. Share Price को Decide करने के 2 Steps होते हैं। पहला होता है  Fixed Price Offer. इसमें Company अपने Shares के Price decide करती है। ये Price Draft Prospectors और Final Prospectors जो वो SEBI को Submit करते हैं  उसपर Submit करना जरुरी होता है और दूसरा Process होता है:- Book Building Offer. इसमें Share Price एक Maximum और Minimum Range में vary कर सकता है।

ये Range Company द्वारा Decide की जाती है। इस Prospector में Draft Prospector की जगह Red hering Prospector Submit किया जाता है। इस Process में Final Prospectors Shares के Allogation के बाद SEBI में Submit किया जाता है।

उसके बाद last Process होता है:- IPO Launching Date, जो आपने अपने Prospectors में Mention की होती है। उस दिन IPO Live हो जाता है। उसपर Investors Shares के लिये Apply कर सकते हैं। Investors को Shares में Apply करने के लिये 3-6 दिन का समय दिया होता है।

तो ऐसे सारे Steps को Follow कर लेने के बाद IPO Launch होता है। तो अब आप समझ गये होंगे कि IPO कैसे Launch होता है।

IPO के लिये Apply करते वक्त और उन्हें खरीदते वक्त याद रखने योग्य बातें

आपको IPO के लिये apply करना होता है। जब आप IPO के लिये apply करते हैं तो ऐसी कोई Guarantee नहीं होती है कि आपको Allotment होगी हीं,आपको share नहीं भी मिल सकती है।

जैसे कि अगर किसी Company का 1,000 shares Available है और 2,000 Shares की application आ जाये तो सभी को तो उसके Demand के अनुसार share नहीं दे सकते न इसलिये आपको share मिलेंगे हीं ऐसा Fix नहीं होता है। आपको यह नहीं भी मिल सकता है।

आप maximum कितने Shares खरीद सकते हैं, उसकी भी एक Limit होती है। आप चाहें भी तो उससे ज्यादा share नहीं खरीद सकते। जरुरी नही है कि आपने जितने Shares के लिये Apply किया है आपको उतने हीं Shares मिल जायेंगे ऐसा नही होता है ये सब Avaibility और कितनी Application आयी है उसके उपर Depend करता है। आपको Shares मिलेंगे हीं ये भी Fix नही होता है।

IPO को कैसे खरीदे ?

IPO में आपका मन चाहे आप उतने shares नहीं खरीद सकते,उसका एक Lot-Size होता है आपको उसके हिसाब से हीं खरीदना होता है। जैसे की कोई Company का IPO आज आया है Market में और उसकी Lot-Size है 30, यानि कि अगर आपको उसके Shares खरीदने हैं तो कम-से-कम 30 खरीदने होंगे और अगर उससे ज्यादा खरीदने होंगे तो आपको 30 के Multiples में खरीदने होंगे

यानि 30×2 या 3,4. ये बात IPO खरीदते वक्त याद रखना है कि IPO ऐसे खरीदते हैं क्योंकि IPO कितने खरीदे ये Company के Lot के हिसाब से होता है आपको कम-से-कम 1 Lot खरीदना होता है और एक Lot में कितने Shares आयेंगे ये Company Decide करती है।

तो आपको कम-से-कम 1 Lot खरीदना होता है और 1 Lot से ज्यादा भी अगर खरीदना है तो आपको उसके Multiples खरीदने होंगे। आप 1 या 2 Shares नहीं खरीद सकते।

IPO खरीदने के फायदे क्या हैं?

दोस्तों जब कोई Company Share Market में आती है और अपने IPO को लाती है तब Generally आपको उसी वक्त सबसे कम Price में Share मिलता है और कुछ समय बाद उस Share की Price दो से लेकर तीन गुना हो हाती है।

आपको इससे related कुछ Interesting बात बताता हूं : 21 September 2020 को Route Mobile Limited का IPO Market में Release हुआ था जब उसकी issue Price थी ₹350

और सिर्फ 7 दिन बाद 28 September 2020 को उसकी Price  ₹938 हो गयी थी मतलब सिर्फ 7 दिनों में आपका पैसा 3 गुना हो गया होता।

और ऐसे हीं 17 September 2020 को Happiest Mind का IPO Launch हुआ था तब उसकी Price सिर्फ ₹166 थी

और 10 दिनों  के बाद मतलब 27 September को उसकी Price ₹363  हो गयी थी यानि Double से भी ज्यादा,तो ये पहला फायदा होता है।

दूसरा फायदा होता है कि जब Company अपना IPO लाती है तो तब Company अपने आप को Expand करने की सोचती है या तो Loan pay करने का सोचती है  यानि एक तरीके से Company आगे बढ़ने जा रही होती है तो उसके Price बढ़ने के या Company grow होने के बहुत ज्यादा Chances होते हैं तो इनमें low Risk होता है कि आपका पैसा डूबेगा और ज्यादा Chances होते है कि आपका पैसा ज्यादा बढ़ जायेगा।

 

IPO के नुकसान क्या होते हैं?

दोस्तों अब तक तो आप समझ हीं गये हैं कि IPO क्या होता है और उसे कैसे Launch करते हैं और आप IPO के Advantages भी समझ चूके हैं। अब हम आपको बताने वाले हैं कि  IPO के Disadvantages क्या होते हैं।

1)सबसे पहला Disadvantage ये होता है कि आपके Company को IPO Launch करने के लिये 6 महीने से लेकर 1 साल तक का वक्त लगता है। इसमे बहुत time लग जाता है।

2) दूसरा Disadvantage ये होता है कि जब एक Company Private से Public Sector की तरफ जाती है तब उन्हें अपने Stocks Exchange के हर Quater अपने Financial States की Report देनी होती है। Stock Exchanges Strictly Regulated होते हैं। जिससे ये Process बहुत हीं लंबा हो जाता है और वक्त भी काफी लेता है। उपर से इसको Complete करने के लिये बहुत से पैसे भी लगते हैं।

3) तीसरा सबसे बड़ा Disadvantage ये होता है Market Pressure:- एक बार अगर आपकी Company Private से Public हो जाती है तब उसके बाद आप Freely Decissions नहीं ले पाती है। क्योंकि आपके द्वारा लिया गया हर Decission Publically Announced और analized होता है जिससे आपके Share Price पर अच्छा या बुरा असर पड़ता है।

4)IPO का चौथा disadvantage ये होता है कि IPO lauch करने के लिये Company की Initial Investment काफी High होती है, जिसमें से 5-7 percent Under Writer की Fees होती है। आपने जिस Investment Bank के Through आपने IPO Under Write किया है उसको आपको 5-7 Percent Gross Amount देनी होती है। इसके अलावा आपको Ligel Fees,Auditor Fees और Registration Fees भी देनी होती है, जिसमें Company का काफी पैसा जाता है।

ये Disadvantages Company को IPO लाने से होते हैं। IPO में बहुत खर्च और बहोत समय बर्बाद होता है।

तो आज हमने इस Article में IPO के बारे में बहुत Detail में बात किया। आपको इसमें IPO के बारे में सारी Information मिली कि IPO क्या होता है, IPO के  Advantages और Disadvantages क्या होते हैं,एक Company अपने IPO कैसे Launch करती है इत्यादि।And last but not least कि IPO खरीदते वक्त आपको कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना होता है।

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