Green House Effect In Hindi | ग्रीनहाउस प्रभाव क्या है तथा ग्रीनहाउस गैस के नाम

नमस्कार दोस्तों क्या आपने कभी सोचा है कि आखिरकार ठंडे देशों में खेती कैसे की जाती होगी तो दोस्तों हम आपको बता दें कि ठंडे देशों में खेतिया,सब्जियों का उत्पादन ग्रीन हाउस प्रभाव के माध्यम से किया जाता है जिसे हम इस लेख के माध्यम से पड़ेंगे तथा इस ग्रीन हाउस प्रभाव से जुड़ी संपूर्ण जानकारी और इसकी प्रक्रिया हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे तो इस लेख को अंत तक पड़े, चलिए शुरू करते हैं इस लेख को,

ग्रीनहाउस प्रभाव की परिभाषा

ग्रीन हाउस प्रभाव वह प्रक्रिया है जिसमें सूर्य से आई पराबैगनी किरणे जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर पृथ्वी के वातावरण में आ गिरती हैं तब ग्रीनहाउस गैस इन किरणों का 20% भाग अवशोषित कर लेता है जिससे वातावरण में ऊष्मा उत्पन्न हो जाती है इस प्रक्रिया को हम ग्रीन हाउस प्रभाव या हरितगृह प्रभाव कहते हैं।

ग्रीनहाउस प्रभाव क्या है ?

Green House Effect In Hindi – ग्रीन हाउस प्रभाव वह प्राकृतिक घटना पर आधारित होती है जिसके माध्यम से पृथ्वी की सतह पर गर्मी बनी रहती है इस प्रक्रिया में जब सूर्य की ओर से प्रकाश की किरण ऊष्मा के रूप में सभी परतो को पार कर ग्रीनहाउस या पृथ्वी के वायुमंडल तक आती है जिससे सूर्य से आई ऊर्जा का कुछ भाग पेड़ पौधे, मिट्टी और ग्रीन हाउस के अन्य संसाधनों द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ कर अन्य ग्रहों की तुलना मे ज्यादा रहता है जिसे हम ग्रीन हाउस प्रभाव के नाम से जानते हैं।

एक दूसरे तरीके से हम इसे कुछ इस प्रकार समझ सकते हैं भारत में मौजूद कई ऐसे देश जहां ग्लेशियरों का पहाड़ है जहां खेती के लिए ऊष्मा का कोई अन्य माध्यम नहीं उस स्थानों पर ठंडे देशों में ग्रीनहाउस अर्थात कांच के बड़े-बड़े तंबू बनाए जाते हैं जिसमें ग्रीनहाउस गैस को छोड़ दिया जाता है

ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाइऑक्साइड(CO2), मेथेन, नाइट्रसऑक्साइड, तथा अन्य गैसों को तंबू में छोड़ा जाता है जिसे सूर्य से आई ऊष्मा को इन गैसों द्वारा अवशोषित कर पेड़ पौधों पर छोड़ दिया जाता है जिससे सूर्य की ऊष्मा का कुछ भाग अवशोषित हो जाता है और शेष बचा हुआ परिवर्तन के कारण बाहर निकल जाता है सेम यही प्रक्रिया पृथ्वी के धरातल में उपस्थित वातावरण के साथ भी होती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह ग्रीन हाउस प्रभाव पृथ्वी पर नहीं होता तो इस पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता क्योंकि इस जगह पर ठंड इतनी ज्यादा बढ़ जाती जिसमें पृथ्वी का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस हो जाता हम सभी जानते हैं पृथ्वी के तीन चौथाई भाग में पानी है और यह पानी, बर्फ, तरल, और वाष्प तीनों रूपों में मौजूद है और हमारे वायुमंडल में उपस्थित जल चक्र जिसके कारण पानी तीनो अवस्था में अपने आप को परिवर्तित कर सकता है, जिससे हमें पीने योग्य पानी मिल पाता है तथा ग्लोबलवार्मिंग पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ग्रीनहाउस गैस क्या है

ग्रीन हाउस गैस वह गैस है जो ग्रीन हाउस प्रभाव को होने में सहायता करती है जो ऊष्मा को अवशोषित करती है जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है अर्थात जब सूर्य की किरणें पृथ्वी पर पड़ती है तो उसमें से कुछ भाग पृथ्वी द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है और अबशोषित के दौरान बची हुई ऊष्मा रिफ्लेक्ट हो जाती है जो अंतरिक्ष पर वापस चली जाती है यह रिफ्लेक्ट होने की प्रक्रिया को हम बेक रेडिएशन भी कहते हैं।

ग्रीन हाउस गैस के नाम

ग्रीन हाउस गैस 6 होती हैं।

इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली गैसों को हम एक ट्रिक के माध्यम से जान सकते हैं

TRICK – “ओमीना कल काजल लगाना”

इन शब्दों का संधि विच्छेद कर गैसों का नाम बता सकते हैं इस ट्रिक में “लगाना” वाक्य शांत रहेगा।

ओ – ओजोन गैस

मी– मीथेन गैस

ना – नाइट्रसऑक्साइड

कल–क्लोरोफ्लोरोकार्बन

का- कार्बन डाईऑक्साइड

जल – जलवाष्प

ग्रीन हाउस गैस प्रोटोकॉल

GHG प्रोटोकॉल वर्ष 2001 में प्रकाशित हुआ था जो पहला संस्करण था यह एक अंतरराष्ट्रीय लेखाकरण साधन है जिसमें सरकार एवं व्यवसाय को नेतृत्व देने के लिए व्यक्तियों (लोगों) को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रति जागरूक करना एवं समझाना, इसका परिणाम निर्धारित करना,ग्रीन हाउस गैस प्रोटोकॉल व्यवसायि को,पर्यावरणीय संस्था एवं सरकार इन सबके साथ मिलकर कार्य करती है इसका कारण यह भी है जिससे वैश्विक स्तर पर एक अच्छा और प्रभावी कार्यक्रम का विकास हो सके जोकि हो रहे जलवायु परिवर्तन से भी निपटने में मददगार है।

यह प्रोटोकॉल जो भी विकासशील देश होते हैं उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी प्रचलित तकनीक दी जाती है जिसमें वैश्विक बाजार और सरकारी स्तर जलवायु परिवर्तन से संबंधित फैसलों की जानकारी रहे।

यह प्रोटोकॉल ग्रीनहाउस को कम करने के लिए चलाई गई एक पहल है जो विकासशील देशों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करती है इसमें वर्ष 2025 तक ग्रीनहाउस गैस प्रभाव को एक समान स्तर तक कम करने के लिए योजनाएं बनाई जाती है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के कुछ सदस्य इसमें जन भागीदारी निभाते हैं।

हरित गृह प्रभाव हमारे लिए लाभदायक एवं हानिकारक दोनों है कैसे ?

जैसे कि दोस्तों हम सभी जानते हैं कि यदि हमें हरित ग्रह प्रभाव से लाभ या फायदा हो रहा है तो कहीं ना कहीं हमें इससे हानि और नुकसान भी होगा अर्थात हम इसमें हरित ग्रह से लाभ और हानि दोनों के बारे में जानेंगे जो कि निम्नलिखित है-

हरितगृह से फायदे –क्योंकि हमने पढ़ा है कि GHG द्वारा अवशोषित ऊष्मा पृथ्वी के वायुमंडल एवं वातावरण में ऊष्मा स्थिरता बनाए रखती है यदि पृथ्वी पर हरित ग्रह प्रभाव नहीं होता तो पृथ्वी का तापमान अर्थात पृथ्वी पर ठंड आज के मुकाबले कई ज्यादा होती जिसके कारण यहां जीवन धीरे-धीरे समाप्त हो जाता इसलिए वायुमंडल में गर्माहट बहुत जरूरी होती है।

  1. आज हरितगृह पृथ्वी पर रह रहे लोगों के लिए लाभदायक इसलिए है क्योंकि हरित ग्रह के कारण ठंडे देशों में उपस्थित ग्लेशियर के पिघलने के कारण हमें पीने योग्य पानी मिल पा रहा अन्यथा हम समुद्र का पानी नहीं पी पाते।
  2. पृथ्वी पर उपस्थित मृदा पेड़ पौधे तथा पृथ्वी का वातावरण यह सब भी प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पर आधारित है जिसका महत्वपूर्ण कारक सूर्य से आने वाली किरण है जिसे हरित गृह प्रभाव के माध्यम से रोक लिया जाता है जिस के कारण पृथ्वी का वातावरण हरा भरा रहता है।
  3. ठंडे देशों में खेतिया, सब्जियों का उत्पादन कर पाना संभव नहीं है उस स्थिति पर भी हरित ग्रह प्रभाव का उपयोग करके सब्जियों और पेड़ पौधों को तैयार किया जाता है जिसमें हरितगृह का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
  4. इसी प्रभाव के कारण पृथ्वी परग्रीष्म, वर्षा, ठंड, तथा अन्य रितुओ का बदलाव होता है।

हरित ग्रह से नुकसान (हानिकारक)– हरित ग्रह प्रभाव का दुष्परिणाम है जो हमारे जीवन के लिए हानिकारक है जो निम्नलिखित है-

  1. ग्रीन हाउस गैस की वृद्धि होती ही जा रही है जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी का तापमान दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है जिससे हमारे वातावरण पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ रहा और यदि तापमान बढ़ता ही जाएगा तो पृथ्वी पर रह रहे लोग पर भी इसका प्रभाव पड़ेगातथा इस पृथ्वी को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण वर्षा की संभावना भी खत्म होते जा रही, जो एक रेगिस्तान को बनने का बढ़ावा देती है।
  2. दूसरा बड़ा कारण यदि तापमान अनियमित रूप से बढ़ता ही जाएगा तो, जो ठंडे देशों में ग्लेशियरों का बना पहाड़ है वह भी पिघलना शुरू हो जाएगा, अभी तो सिर्फ कुछ ही मात्रा में पिघल रहा है जिसे हम पीने योग्य पानी के रूप में उपयोग कर रहे है लेकिन कहीं यह बड़ी मात्रा में पिघलना शुरू हो गया तो यह बाढ़ को चुनौती देने बराबर होगा।
  3. और यदि पृथ्वी पर ग्रीन हाउस गैसों के कारण तापमान पर वृद्धि होती रही तो पृथ्वी का तापमान बहुत ज्यादा हो जाएगा जिसके कारण समुद्र का जल स्तर बढ़ जाएगा, गर्म हवा चलने लगेगी, पीने योग्य पानी नहीं मिलेगा, जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होगा।
  4. जिन जीव-जंतु की तापमान सहन करने की क्षमता कम होती है वह नष्ट हो जाएंगे धीरे-धीरे जानवरों का चेहरा इस पृथ्वी से विलुप्त होते जाएगा तथा संपूर्ण पृथ्वी में जैव विविधता का हास्य नुकसान होगा।

तो अब आप जान ही चुके होंगे कि हरितगृह गैसों के कारण हमारे जीवन में कितने दुष्परिणाम आ रहे हैं इस समस्या से बचने के लिए हमें अधिक वृक्षारोपण की आवश्यकता है तथा पर्यावरण को साफ सुथरा रखने की जरूरत और हो रहे प्रदूषण को कम करने का प्रयास करना होगा।

हरित गृह प्रभाव का सर्वाधिक कारण क्या है ?

  1. यदि मुख्य रूप से देखा जाए तो हरितगृह का कारण कार्बन डाइऑक्साइड गैस है क्योंकि यह ऐसी गैस है जो दीर्घकाल तक लंबे समय तक बनी रहती है इसका अस्तित्व 50 से लेकर 200 वर्ष तक बना रहता है अर्थात यदि कार्बन डाइऑक्साइड गैस का फैलाव एक बार वायुमंडल में हो जाए और इसकी मात्रा में वृद्धि हो जाए तो इसे कंट्रोल कर पाना बहुत ही कठिन हो जाता है
  2. इसका दूसरा कारण जनसंख्या विस्फोट भी है जनसंख्या वृद्धि के कारण प्रदूषण भी बढ़ रहा है जिसके कारण पृथ्वी का वायुमंडल प्रभावित हो रहा है यदि जनसंख्या में वृद्धि होगी तो यातायात तथा उपकरणों यह सभी टेक्निकल सामग्रियों का दोहरा उपयोग होगा जिससे प्रदूषित गैस निकलती है जो प्रदूषण को बढ़ावा देती है
  3. प्रतिदिन कई हजारों की मात्रा में पेड़ों को काटा जा रहा वनों जंगलों का विनाश किया जा रहा है जिससे मानव जाति को शुद्ध ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही यह भी हरित ग्रह के कारण में शामिल है
  4. ज्यादा रेफ्रिजरेटर,एयरकंडीशनर,कूलर का उपयोग करना जिससे क्लोरोफ्लोरोकार्बन नामक एक गैस निकलती है जो वायुमंडल को प्रभावित करती है।

हरित ग्रह प्रभाव का नियंत्रण

हरित ग्रह प्रभाव के कारण संपूर्ण पृथ्वी में खतरा सा उत्पन्न होते जा रहा है इस प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख उपाय निम्नलिखित है।

  1. हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाली रेफ्रिजरेटर जिसमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस का प्रयोग किया जाता है जिसके कारण ओजोन परत में छिद्र हो रहा है तथा जो हरित ग्रह प्रभाव को खतरा बनाने में पूरा योगदान दे रहा है हमें इसका उपयोग कम से कम करना होगा तथा वैज्ञानिक तकनीक की सहायता से हमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस युक्त रेफ्रिजरेटर का आविष्कार करवाना चाहिए जो प्रदूषण रहित हो।
  2. हरित ग्रह प्रभाव के लिए सर्वाधिक योगदान देने वाली गैस CO2 जिसकी मात्रा में वृद्धि होती ही जा रही उसे भी हमें रोकना है अर्थात हमें वृक्षारोपण को बढ़ावा देना होगा।
  3. बड़े स्तर पर हो रहे वनों की, जंगलों की कटाई को रोकने के साथ ही इसका विस्तार किया जाना चाहिए।
  4. तथा जनसंख्या वृद्धि भी इसका कारण है अतः इसे भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।
  5. रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग सीमित मात्रा में करना होगा इनके स्थानों में हमें जैविक खादों का उपयोग करना चाहिए।

इस लेख के माध्यम से हमने हरित गृह प्रभाव के बारे में आपको संपूर्ण जानकारी देनी चाहिए यह लेख पढ़कर आपको क्या अनुभव हुआ तथा यह लेख आपको कैसा लगा कमेंट बॉक्स पर जरूर बताएं,

धन्यवाद।।।

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