Global Warming In Hindi | ग्लोबल वार्मिंग क्या है इसके प्रमुख कारण और उपाय

Global Warming In Hindi – नमस्कार दोस्तों आज हम जानेंगे ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जिसे हिंदी में वैश्विक तापमान कहते हैं अपने वायुमंडल में हो रही तापमान की बढ़ोतरी, भूकंप की संभावना, सूखा पड़ना जैसी बड़ी सी बड़ी आपदा में बदलाव ग्लोबल वार्मिंग के कारण है।

आमतौर में देखें तो दुनिया में काफी लोग ऐसे हैं जिन्हें ग्लोबल वार्मिंग के बारे में नहीं पता और आज के भाग दौड़ में लोग इतना व्यस्त हैं कि उन्हें इन सब से कोई मतलब नहीं,यहां विज्ञान की बात करें तो वैज्ञानिकों द्वारा खतरा का संकेत बढ़ता ही जा रहा है उनके द्वारा 21 वी शताब्दी में सबसे बड़ा खतरा बताया जा रहा है जिसे कंट्रोल ना करने पर यह एक क्षुद्र ग्रह का पृथ्वी से टकराव या तृतीय विश्वयुद्ध की तरह भयानक प्रलय जैसा प्रतीत हो रहा है।

तो चलिए दोस्तों आज हम लोग ग्लोबल वार्मिंग क्या है विस्तार से जानेंगे और ग्लोबल वार्मिंग का कारण, ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव, यह क्यों बढ़ रहा तथा इसे कैसे रोका जाए, इसका परिणाम, इसके ऊपर काम करने वाली संस्थाएं तथा इनसे जुड़ी और भी जानकारी के बारे में जानेंगे तो चलते हैं इस लेख की तरफ,,

ग्लोबल वार्मिंग क्या है

ग्लोबल वार्मिंग की परिभाषा – वायुमंडल में उपस्थित हानिकारक गैस जैसे ग्रीनहाउस गैस (मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन ) इन सब के कारण पृथ्वी के वायुमंडल के तापमान में हो रही बढ़त को ही हम ग्लोबल वार्मिंग का नाम देते हैं।

चलिए दोस्तों हम इसेकुछ आसान शब्दों में समझते हैं जब सूर्य की किरणें (पराबैगनी किरण) पृथ्वी पर प्रवेश करते हुए पृथ्वी के वायुमंडल में आ जाती हैं लेकिन हमारे वायुमंडल मेंउपस्थित अवांछनीय गैसे जो कि वायुमंडल में एक परत की तरह जमते जा रही है वह इस पराबैगनी किरणों को पृथ्वी के वायुमंडल में आने तो देती हैं लेकिन इसे परिवर्तन के कारण बहुत ही कम मात्रा में जाने देती हैं जिसके कारण वायुमंडल का तापमान बढ़ता ही जा रहा और आमतौर में हम इसे ग्लोबल वार्मिंग या वैश्विक तापमान का नाम देते हैं।

इसे कुछ उदाहरण के जरिए समझे तो पृथ्वी का तापमान 100 वर्ष के पहले  0.74 ± 0.18 °C के नीचे था तथा लेकिन 2005 के दौरान यदि तुलना करें तो0.74 ± 0.18 °C  (1.33 ± 0.32 °F ) तापमान है आज यह लगातार बढ़ता जा रहा है जिसे देख कर ही समझ में आता है कि ग्लोबलवार्मिंग कितनी तेजी से बढ़ रही

इस परिवर्तन का मुआयना करने वाले वैज्ञानिक के तहत यह निष्कर्ष निकाला गया कि हमारी जो 20वीं शताब्दी है उस के मध्य से संसार के औसत तापमान में जो वृद्धि हुई है वह 21वी शताब्दी तक बहुत ही घातक रूप लेगी जिसका मुख्य श्रेय मनुष्य द्वारा निर्मित ग्रीनहाउस और अन्य गैस हैं। अब चलिए जानते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग होने का कारण क्या है

ग्लोबल वार्मिंग का कारण / ग्लोबल वार्मिंग क्यों बढ़ रहा है?

1.ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने का एक कारण यह भी हो सकता है जिसमें पृथ्वी पर उपस्थित पेड़ पौधों को निरंतर काटा जा रहा जिससे मनुष्य द्वारा छोड़ी गई CO2 गैस जिसे पेड़ पौधे अवशोषित कर हमें शुद्ध ऑक्सीजन गैस देते हैं लेकिन पेड़ पौधों की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है इसलिए निरंतर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ते ही जा रही जो कि वायुमंडल की परत को प्रभावित कर खुद जमते जा रहे हैं जिससे पृथ्वी का तापमान पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर नहीं जा पा रहा जिससे तापमान मे वृद्धि हो रही ।

2.इसका दूसरा और बड़ा कारण यह भी है कि ठंडे देशों में उपस्थित ग्रीनहाउस, ठंडी देश में जहां खेती तथा सब्जियों का उत्पादन कर पाना संभव नहीं होता क्योंकि कुछ सब्जियों में गर्मी की आवश्यकता होती है जो ठंडे देश में संभव नहीं है

इस सब्जियों के लिए गर्मी को बनाकर रखने के लिए एक तंबू या कांच का घर बनाया जाता है जिसमें ग्रीनहाउस वाली गैस को छोड़ दिया जाता है जब सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें सीधे कांच के तंबू में प्रवेश करती है तब अंदर उपस्थित ग्रीनहाउस गैस के कारण वह बाहर नहीं आ पाती जिससे अंदर का तापमान नियंत्रित बना रहता है तब सब्जियों का उत्पादन अच्छे से हो पाता है

लेकिन इस कांच के घरों में उपस्थित गैसे, सूर्य की किरणों को बाहर जाने से रोकती हैं वही इस ग्लोबल वार्मिंग का कारण बन गई है समान प्रक्रिया जो ग्रीन हाउस में होती है वही प्रक्रिया आज हमारे पृथ्वी वायुमंडल के साथ हो रही है अगर इसका उपयोग आज इतना ना फैलता तो हमारे पृथ्वी का तापमान वर्तमान से काफी कम होता।

हम आपको एक मूवी के बारे में बता रहे हैं जिसका नाम है ‘The inconvenient truth’ जो कि 24 मई 2016 में रिलीज हुई थी जिसके अभिनेता अलगोर रहे जो कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति रह चुके हैं इस मूवी में ग्लोबलवार्मिंग के बारे में पूरा सचित्र चित्रण है जिसका प्रमुख कारण मानव गतिविधियों द्वारा निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड को बताया गया है इस मूवी को ऑस्कर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

3. इसका तीसरा बड़ा कारण जनसंख्या विस्फोट भी है क्योंकि जैसे-जैसे जनसंख्या वृद्धि हो रही यह समस्या को जन्म देते जा रही, जनसंख्या वृद्धि होगी तो मानव द्वारा निर्मित वस्तुओं का दोहरा उपयोग होगा जिससे प्रदूषण की स्थिति में गहरा असर पड़ेगा तथा प्रदूषण से उत्पन्न गैस यदि वायुमंडल को प्रभावित करेंगी तो ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ेगा।

इन सबके अलावा हम बात करें तो आवश्यकता से ज्यादा आधुनिकरण अर्थात जरूरत से ज्यादा टेक्नोलॉजी का उपयोग करना जिससे उत्पन्न प्रदूषण भी इसका कारण हो सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज पृथ्वी के तापमान पर निरंतर परिवर्तन हो रहा जिसके कारण धरातल की जलवायु पर भी बुरा असर पड़ रहा है इसके साथ-साथ यह पृथ्वी के वातावरण पर भी प्रभाव डाल रहा है चलिए इससे जुड़े और भी परिणाम में नजर डालते हैं –

पौधों और जानवरों पर प्रभाव – बढ़ते तापमान के कारण पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी बढ़ती ही जा रही जिससे कई पेड़-पौधे जीव जंतु का चेहरा पृथ्वी से गायब होते जा रहा है कई पौधे ऐसे होते हैं जिन्हें ज्यादा तापमान की आवश्यकता नहीं होती जो प्राकृतिक तापमान पर ही अपनी बढ़ोतरी कर लेते हैं

ऐसे मे उनके प्राकृतिक में तापमान बढ़ा दिया जाए तब उनका भी जीवन काल ज्यादा दिन का नहीं होगा इसी प्रकार जितने भी जानवर हैं वह भी यही प्रक्रिया पर आधारित होते हैं।

समुद्र स्तर में वृद्धि तथा प्रभाव–  तापमान वृद्धि के कारण ग्लेशियर के पिघलने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है और ग्लेशियर का पिघलना शुरू भी हो गया है जिसके कारण ग्लेशियर का पानी सीधा महासागर, समुद्र में ही जा रहा है जिससे समुद्र स्तर निरंतर बढ़ता ही जा रहा जिसकी वजह से तटीय इलाकों में बसे गांव, शहर को भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है

तथा ग्रीनहाउस गैस की वजह से वर्षा भी अम्ली होती है जो मानव के लिए भी घातक है और यह पानी सीधा महासागर में जाकर समाहित हो जाता है जिससे महासागर का पानी भी अम्लीय होते जा रहा है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव– जैसे ही वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैस बढ़ते ही जा रही उसी कारण पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित शुद्ध ऑक्सीजन गैस धीरे-धीरे कम होती जा रही जिसके कारण मानव को सांस लेने में समस्या और फेफड़ों में संक्रमण जैसी बीमारी बढ़ती ही जा रही, गर्मी की वजह से सिर दर्द और चक्कर जैसी समस्याओं में वृद्धि हो रही।

ग्रीन हाउस गैसों के कारण वर्षा पर भी प्रभाव पड़ा है कई क्षेत्रों पर लगातार वर्षा तो कई क्षेत्रों पर वर्षा की एक बूंद नहीं जिन क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही वहां बाढ़ तक आने की स्थिति बन जाती है और अन्य क्षेत्रों में सूखा की स्थिति, जलवायु का निरंतर बदलाव के कारण वातावरण में संतुलन बिगड़ रहा है।

सबसे जरूरी बात लोगों पर जागरूकता की कमी भी है अर्थात ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता कमी इसलिए भी है क्योंकि ना तो सरकार इसके ऊपर ध्यान दे रही और लोगों के पास इसे समझने का समय ही नहीं, जागरूकता अत्यधिक जरूरी है।

ग्लोबल वार्मिंग का कारण कौन सी गैस है?

ईंधन का प्रयोग भी निरंतर बढ़ता ही जा रहा है उदाहरण के लिए पेट्रोल, डीजल, कोयला, तथा कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन, गैस भी ग्लोबलवार्मिंग के कारण है।

ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के लिए उपाय

  1. सर्वप्रथम वृक्षारोपण को बढ़ावा देना तथा पेड़ों की कटाई को रोकना।
  2. ईंधन का प्रयोग अब धीरे-धीरे कम करते जाना चाहिए और अब तो इलेक्ट्रिकगाड़ियां भी शुरू हो गई है तो ईंधन का कम से कम उपयोग करें।
  3. इससे निपटारन के लिएटेक्निकलडेवलपमेंट की सहायता ले सकते हैं देश में ऐसी रेफ्रिजरेटर का अविष्कार होना चाहिए जिसमें CFC ( क्लोरोफ्लोरोकार्बन) का इस्तेमाल बिल्कुल ना हो उसे एक नए तरीके से बनाया जाए जो प्रदूषण रहित हो।
  4. कारखानों,उद्योगों तथा घरों में कोयला और तेलों के जलने से उत्पन्न प्रदूषण यह भी बहुत ज्यादा प्रभावित करता है तो इसे भी कम से कम उपयोग में लेना चाहिए।
  5. तथा सरकार द्वारा ऐसी सामग्री को बनवाया जाए जिसका recycleहो सकेबाकी सामानों पर बैन लगा देना चाहिए जिससे प्लास्टिक का उपयोग भी कम होगा।
  6. अत्यधिक जहरीली धुआं छोड़ती चिमनीयाजो की कारखानों में लगी होती है  उसे भी कम करने की आवश्यकता है।
  7. शहरीकरण भी इसका कारण हैजंगलों को काट करशहरीकरण, इसे भी कम करने की जरूरत है ।

कुछ संस्थाएं हैं जो कि इस ग्लोबल वार्मिंग को कम करने का प्रयास निरंतर कर रही है जो निम्नलिखित है–

  1. क्योटा प्रोटोकॉल- यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसे ग्लोबलवार्मिंग द्वारा हो रहे वायुमंडल में परिवर्तन उन का नियंत्रण तथा रोकने के लिए बनाया गया है यह संधि के द्वारा एक कमेटी प्रतिस्थापित की गई है जिसमें कुछ देश शामिल है जो ग्रीन हाउस गैस का उपयोग करने के लिए प्रतिबंधित है तथा वह देश वैज्ञानिकों की राय पर आधारित है अर्थात वैज्ञानिक द्वारा दिया गया सुझाव पर ही वह काम करेंगे इसका निर्माण 11 दिसंबर 1997 में जापान में हुआ था धीरे-धीरे इस प्रोटोकॉल में 192 पार्टियां जुड़ी हुई थी फिर सन 2012 में कनाडाइसप्रोटोकॉल से स्वयं ही हट गया है।
  2. ग्लोबल वार्मिंग पॉलिसी फाउंडेशन (GWPF) –UK द्वारा यह समूह को बनाया गया है इसका भी उद्देश्य बढ़ती ग्लोबलवार्मिंग को कम करने के लिए अनेक कदम उठाना है इसकी स्थापना नवंबर 2009 में हुई थी लेकिन सन 2014 में चैरिटी कमिशन ने यह फैसला दिया था कि जीडब्ल्यूएफ अपने निष्पक्षता के लिए कई नियमों का उल्लंघन किया था जिसके कारण है यह कम प्रचलित है।
  3. COP -26  – वैज्ञानिक का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अर्थात ग्लोबलवार्मिंग वृद्धि में मीथेन गैस का सबसे ज्यादा योगदान है इस संस्था में राज्य अमेरिका और यूरोप संघ ने 2030 तक ग्रीनहाउस गैस मीथेन को कम करने का संकल्प लिए है तथा इसके साथ-साथ 14 और अन्य देश भी इस मिशन में हस्ताक्षर किए हैं तथा 2050 तक 0.2 डिग्री सेल्सियस तक मीथेन को कम करने का टारगेट है जिस से उत्पन्न हो रही समस्या वापस अपने स्थिति में लौटेगी।

ग्लोबल वार्मिंग विवाद

जब भी ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे पर सभा आयोजित की जाती है तब यह सभा सार्वजनिक बहस की चिंता करता है कि ग्लोबल वार्मिंग क्या अभी भी हो रही है, आधुनिक समय में कितना हुआ, कितने प्रतिशत बढ़ा या घटा, यदि बड़ा तो इसका क्या कारण है, यदि अभी बढ़ते ही जा रहा तो क्या इसे रोकने के लिए कोई कार्यवाही की जा रही, तथा जो भी संगठन बनाए गए हैं क्या वह काम नहीं कर रहे, इन सब मुद्दों में बातचीत होती है फिर उसे कम कैसे किया जाए और रोका जाए इसकी भी जानकारी दी जाती है।

तथा इस तरह की सभा, जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर में आयोजित की जाती है वह अधिकतरअमेरिका में ही आयोजित की जाती है।

इस लेख के माध्यम से हमने आपको संपूर्ण जानकारी देनी चाहि अतः आपको यह लेख पढ़कर कैसा लगा हमें फीडबैक के तौर पर कमेंटबॉक्स पर जरूरबताएं।धन्यवाद।।

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