भारत की नदियां उनके नाम तथा प्रकार

नमस्कार दोस्तों प्राचीन काल में यातायात का माध्यम उसके साथ-साथ आदिमानव काल में भोजन का माध्यम और भी कई चीजों का माध्यम है जिसे हम नदी कहते हैं भारतीय राजनीति में कई नदियों का प्रचलन है कई नदियां प्रवाहित होती हैं

तथा भारत में छोटी बड़ी नदियां मिलाकर लगभग 200 नदियां हैं जो भारत से प्रवाहित होकर कई अन्य देशों में चली जाती हैं और कुछ समुद्र में समाहित हो जाती है भारत  में कितनी नदियां हैं तथा उसका मार्ग क्या है तथा इससे जुड़े और भी जानकारी हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे  अतः इस लेख को अंत तक पढ़ें

भारत की नदियां

हम बात करें भारत की नदी से आशय तो इसका अर्थ यह है कि भारत के भूतकाल (धरती) पर प्रवाहित एक जलधारा जो कई साधनों का माध्यम है जिसका स्त्रोत बारिश का पानी, झील, झरना, हिमनद हो सकता है जो अंत में जाकर सागर या झील में विलीन हो जाती है तथा भारत के किसी भी स्थान से उद्गम होकर बहने वाली नदी को हम भारत की नदी कहते हैं।

नदियों के प्रकार –

आमतौर में देखा जाए तो नदियां दो प्रकार की होती हैं जिसमें हम एक को बरसाती कहते हैं और दूसरे को सदानीरा , जिसे हम थोड़ा विस्तार से जानेंगे

बरसाती – जैसे कि नाम से समझ में आ रहा बरसाती अर्थात जब वर्षा रितु के समय वर्षा होती है तब कुछ नदियां वर्षा पर आधारित होती हैं अन्यथा उनके सूख जाने की भी संभावना होती है।

सदानीरा – सदानीरा का सामान्य आशय यह है कि जो नदियां वर्षा के पानी पर आश्रित ना रहकर जिनका स्रोत या पानी का माध्यम कुछ अन्य हो जैसे की झील, झरना, हिमनद आदि।

भारत की नदियों का वर्गीकरण – 

इन नदियों को हम चार भागों में बांट सकते हैं जो निम्नलिखित है।

  • हिमालय से निकलने वाली नदियां
  • तटवर्ती नदियां
  • प्रयद्वीपीय नदिया या दक्षिण से निकलने वाली नदियां
  • अंतर्देशीय नालों से द्रोणी क्षेत्र की नदियां 

हिमालय से निकलने वाली नदियां –

जो भी नदिया हिमालय से निकलती है उनका माध्यम बर्फ और ग्लेशियरों हिमानी होता है अर्थात बर्फ या ग्लेशियरों के पिघलने के कारण ही पानी का बहाव बनता है जिसके कारण इन नदियों का बहाव पूरे वर्ष निरंतर बना रहता है

इसका पानी कभी नहीं सूखता हिमालय में चारों तरफ बर्फ और हिमानी होने के कारण इस के जल ग्रहण क्षेत्र सैकड़ों हजारों वर्ष किलोमीटर में फैले हैं हिमालय से निकलने वाली प्रमुख 3 नदियां हैं जिसे नदी तंत्र में विभाजित किया गया है।

  • सिंधु नदी तंत्र
  • गंगा नदी तंत्र
  • ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र

यह तीनों नदियां हिमालय से निकलती है तथा पहले तो यह तीनों नदियां एक साथ ही निकलती हैं अर्थात कहने का भाव यह है कि यह नदियां शिवालिक या हिंद ब्रह्म नदी के नाम से निकलती हैं और बहना शुरू करती हैं

पहले यह नदी असम से होकर पंजाब तक बहती थी लेकिन इस नदी के साथ एक हादसा हुआ मतलब प्लीस्टोसीन कॉल की बात है जब पोटवार पठार का उत्थान हुआ था तब इस उत्थान के कारण यह नदी छिन्न-भिन्न हो गई तथा अलग अलग होने के बाद यह तीन नदी तंत्र में बैठ गई जिसका नाम पड़ा सिंधु, गंगा, और ब्रह्मपुत्र इन तीनों नदी के तंत्र के बारे में हम जानेंगे

सिंधु नदी तंत्र

सिंधु नदी तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील के पास उपस्थित चेमायुंगडुंग नामक ग्लेशियर से निकलती है इसकी संपूर्ण लंबाई 2880 किलोमीटर की है लेकिन यह नदी भारत में आकर आधी हो जाती है अर्थात भारत में इसका विस्तार 1114 किलोमीटर है

जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है यदि सिर्फ भारत बस की बात करें पाकिस्तान को छोड़कर तो इसकी कुल लंबाई 709 किलोमीटर है इस सिंधु नदी की कई अन्य सहायक नदियां भी है जिसके बारे में हम जानेंगे।

सिंधु नदी की सहायक नदियां – सिंधु नदी की सहायक नदियों को हम दो तरीकों से देख सकते हैं।

बायी तरफ से मिलने वाली सहायक नदी – चिनाब, रावी, व्यास, सतलज, जास्कर, स्यान्ग, सिंगार, दिलजीत तथा झेलम की संयुक्त धारा।

दायी तरफ से मिलने वाली सहायक नदी – श्लोक, काबुल, कुर्रम, गोमल, आदि।

सिंधु नदी के विवाद के बाद सन 1960 में इसका समझौता हुआ जिसे सिंधु जल समझौते के नाम से जानते हैं जिसके अंतर्गत सिंधु वा उसकी सहायक नदी में चेनाब और झेलम नदी का 20% जल उपयोग कर सकते हैं

जबकि डरावी वह सतलज के 80 प्रतिशत जल का उपयोग कर सकते हैं यह नदी का मार्ग अर्थात सिंधु नदी भारत से गुजरकर पाकिस्तान में प्रवेश करती है इसके बाद यह कराची के निकट अरब सागर में जाकर मिल जाती है जिसमें झेलम और चेनाब, रावी, सतलज, गंगा नदी के बारे में जानेंगे।

झेलम नदी – झेलम नदी के किनारे श्रीनगर स्थापित है झेलम नदी पीर पंजाल पर्वत में स्थित शेषनाग झील है जिसमें बेरीनाग झरना है इसी झरना से झेलम नदी का उद्गम होता है और यह नदी बहते हुए वूलर झील में जाकर मिल जाती है फिर यह आगे जाकर अंत में चिनाब नदी में मिल जाती है इसकी सहायक नदी किशनगंगा नदी है जिसे पाकिस्तान पर नीलम नदी नाम से जाना जाता है।

चिनाब नदी – झेलम के मुकाबले चिनाव सिंधु नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है चिनाब नदी लाहुल में बाडालाचा दर्र के दोनों तरफ से निकलती है जिसके एक का नाम चंद्र तथा दूसरे का नाम भागा यह दोनों नदी के रूप में निकलती है इसीलिए हिमाचल प्रदेश में इसे चंद्रभागा के नाम से भी जाना जाता है।

रावी नदी – यह नदी हिमाचल प्रदेश के कोन्गड़ा जिले में रोहतांग दर्र के पास ही इस नदी का उद्गम स्थल है यह पंजाब में बहने वाली पांच नदियों में से एक है उसके साथ सत्य पंजाब की सबसे छोटी नदी भी है।

सतलज नदी – किस नदी का उद्गम स्थल तिब्बत में मानसरोवर के निकट राकस ताल में है तत्पश्चात इसका भारत में प्रवेश शिपकीला दर्र से प्रवेश करती है इस सतलज नदी पर भाखड़ा नांगल बांध बनाया गया है।

गंगा नदी – गंगा नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गोरखपुर नामक शहर के निकट स्थित गंगोत्री हिमनद स्थान से भागीरथी के रूप में निकलती है जो आगे जाकर देवप्रयाग में अलकनंदा एवं भागीरथी के संगम के बाद यह एक धारा के रूप में नदी के समान बहती है जिसको गंगा नदी के नाम से जाना जाता है गंगा नदी का मिलाप यमुना नदी से प्रयागराज  के निकट होता है जिसे संगम या प्रयाग के नाम से जाना जाता है।

गंगा ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र –

बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी को जमुना के नाम से जाना जाता है जो भागीरथी गंगा में जाकर मिल जाती है जिसकी संयुक्त धारा को पदमा कहा जाता है फिर आगे पद्मा नदी में मेघना नदी मिलती है बांग्लादेश में बाद में गंगा और ब्रह्मपुत्र की संयुक्त द्वारा मेघना नदी से मिलकर आगे बढ़ती है

तथा यह छोटी-छोटी धाराओं में बैठ जाती है जो बाद में बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है यह दुनिया का सबसे सुंदर डेल्टा बनाने वाली नदी में से एक है जो गंगा ब्रह्मपुत्र पर बनता है जिसका फैलाव हुगली और मेघना नदियों के बीच है तथा इस डेल्टा के पास सुंदरी वृक्ष की अधिकता है इसलिए इस डेल्टा को सुंदरवन डेल्टा के नाम से भी जाना जाता है।

सहायक नदी – इसकी सहायक नदी को दो भागों में बांटा जा सकता है

दायी ओर की तरफ से मिलने वाली नदियां – सोन, यमुना, टोंस

बायी ओर की तरफ से मिलने वाली नदियां – महानंदा, कोसी, ब्रह्मपुत्र, गंडक, घाघरा, गोमती, बूढ़ी गंगा 

इसी नदियों में देश का पहला गिलास फ्लोर ब्रिज बनाया गया जिसका फर्श मजबूत पारदर्शी कांच का होगा तथा इसी नदी में ऋषिकेश में 95 वर्षों का बना लक्ष्मण झूला भी स्थित है।

यमुना नदी – इसकी लंबाई 1370 किलोमीटर है जो कि गंगा की सबसे लंबी नदी में से एक है इसका उद्गम बंदरपूंछ में स्थित यमुनोत्री हिमनद से होता है इसकी मुख्य सहायक नदी सिंध, हिंडन, केन, , ऋषिगंगा, बेतवा, चंबल, आदि है।

रामगंगा नदी – इसका उद्गम स्थल नैनीताल अर्थात गैरसेण के पास स्थित गढ़वाल की पहाड़ियां में है जो पहाड़ियों से निकलकर कन्नौज के समीप गंगा में जाकर मिल जाती हैं।

गंडक नदी – यह नदी नेपाल से होते हुए आती है इसे नेपाल में शालिग्राम नदी के नाम से जाना जाता है जो कि पटना शहर से निकट गंगा नदी में जाकर मिल जाती है।

घाघरा (सरयू) नदी – इस नदी का उद्गम स्थान नेपाल का मापसा तुंग हिमानी है यहीं से यह निकलती है तथा आगे जाकर बिहार के छपरा के निकट गंगा में मिल जाती है इस नदी के किनारे अयोध्या, बलिया, फैजाबाद शहर बसे हैं घाघरा नदी की सहायक नदी शारदा एवं राप्ती नदियां हैं।

कोसी नदी – इस नदी को बिहार में शोक के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह नदी बार-बार अपने मार्ग को बदलकर हर बार बाढ़ लाने का कारण बनती है यह नदी सात धाराओं से मुख्य धारा अरुण नाम से माउंट एवरेस्ट के पास गोसाईथान चोटी से निकलकर भागलपुर जनपद के निकट स्थित गंगा नदी में जाकर मिल जाती है।

तमसा (दक्षिण टोंस) नदी – यह नदी कयूम की पहाड़ियों से निकलती है तथा आगे प्रयागराज में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है।

हुगली नदी – इसका जन्म पश्चिम बंगाल में गंगा की वितरिका के रूप में होता है तथा यह नदी आगे जाकर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

सोन नदी – यह पुष्प राजगढ़ तहसील के पास अमरकंटक पहाड़ियों से निकलती है जो आगे जाकर पटना से पहले गंगा नदी में मिल जाती है।

यमुना नदी की सहायक नदियां – यमुना नदी की सहायक नदियां निम्नलिखित है।

बेतवा नदी – इसका उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले मैं विंध्य पर्वतमाला मे है तथा बेतवा नदी आगे जाकर हमीरपुर शहर के निकट यमुना नदी में जाकर मिल जाती है।

चंबल नदी – किस नदी का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के नाउ (इंदौर) के पास स्थित जानापाव पहाड़ी में है आगे जाकर यह इटावा के पास यमुना नदी में जाकर मिल जाती है इस की सहायक नदी पार्वती, बनास, कालीसिंध एवं क्षिप्रा है।

केन नदी – इस नदी का उद्गम स्थल मध्यप्रदेश के सतना जिले के पास कैमूर की पहाड़ी में है आगे जाकर यह बांदा के पास यमुना में मिल जाती है।

सिंध नदी – इस नदी का उद्गम स्थल गुना जिले के सिरोंज तहसील के पास है जहां से यह नदी निकलती है

चंबल की सहायक नदियां – चंबल नदी की सहायक नदियां निम्नलिखित हैं।

कालीसिंध नदी – यह नदी मध्य प्रदेश में स्थित देवास जिला जहां बागली गांव है उस गांव में विंध्य पहाड़ी से यह नदी निकलती है एवं आगे जाकर चंबल नदी में मिल जाती है।

बनास नदी – इस नदी का उद्गम स्थल बनास अरावली श्रेणी की खमनोर पहाड़ी में है यह नदी खमनोर पहाड़ियों से निकलकर कुछ दूर में चंबल में मिल जाती है।

पार्वती नदी – इस नदी का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के विंध्य श्रेणी में है एवं यह नदी आगे जाकर राजस्थान में चंबल नदी में मिल जाती है।

शिप्रा नदी – इसका उद्गम स्थल इंदौर के निकट का आखिरी पहाड़ी में है एवं आगे जाकर यह चंबल में मिल जाती है इसी नदी के किनारे उज्जैन के बाबा महाकाल का मंदिर है एवं यहां हर 12 बरस में कुंभ का मेला लगता है।

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र –

ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्थल तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील के पास आंग्सी हिमनद में है इस नदी को तिब्बत में सांग्यो नाम से जानते हैं फिर जब यह अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है तब वहां इसे दीहांग के नाम से जानते हैं आगे चलकर इसकी दो सहायक नदी बनती है एक दिबांग और दूसरी लोहित

जिनके मिलने को हम ब्रह्मपुत्र कहते हैं तथा ब्रह्मपुत्र नदी को बांग्लादेश में जमुना के नाम से जानते हैं साथ में बांग्लादेश में ही तीस्ता नदी ब्रह्मपुत्र से मिलती है अंत में इन सब के बाद ब्रह्मपुत्र गंगा में जाकर मिल जाती है।

ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियां – ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां निम्नलिखित हैं जिन्हें हम दो भागों में बांट सकते हैं।

बायी ओर की तरफ से मिलने वाली नदियां – धनश्री, लोहित, कलांग, दिबांग,

दाई ओर की तरफ से मिलने वाली नदियां – कामेंग, संकोज, सुबनसिरी, तीस्ता, मानस

गुंफित, सरिता नदी – इस नदी से उत्पन्न लघु, उथली, तथा संगृथित सरिताआएं और नदी के मुहाने के पास भूमि का ढाल पन अत्यंत कम होने की वजह से बड़ी मात्रा में मलवे का जवाब होता रहता है जिसके कारण डेल्टा का निर्माण होता है इस डेल्टा में नदी का जल कई भागों में या शाखाओं में विभक्त हो जाता है आगे जाकर यह मिलती है फिर अलग होती है यह प्रक्रिया होती रहती है इसी कारण या डेल्टा अत्यंत सुंदर दिखाई पड़ता है।

तटवर्ती नदियां – 

हमारे भारत देश में कई ऐसी तटवर्ती नदियां हैं जो बड़ी नदियों की अपेक्षा छोटी हैं ऐसी नदियों में बहुत कम ही नदियां पूर्वी तट के पास डेल्टा बनाकर समुद्र में जाकर मिल जाती हैं और देखा जाए तो पश्चिम तट पर टोटल 680 नदियां हैं

राजस्थान में कुछ ऐसी भी नदियां है जो समुद्र में जाकर नहीं मिलती यह सीधे खारी झील में मिल जाती हैं अर्थात वेद में जाकर समाप्त हो जाती हैं जो समुद्र में नहीं निकलती इसकी निकासी नहीं होती है इसके अलावा कुछ ऐसी भी नदियां हैं जिसे मरुस्थल की नदियां कहते हैं

जो कुछ भी दूर तक बहती है और आगे जाकर विलुप्त हो जाती हैं मरुस्थल की कुछ नदियां निम्नलिखित है घग्घर, रुची, बनास, मच्छक,  सरस्वती, स्पेहन आदि है

दक्षिण से निकलने वाली नदियां या प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र –

ढक्कन क्षेत्र की अधिक से अधिक नदियां अर्थात जो भी ढक्कन क्षेत्र से निकलती हैं उनके बहने की दिशा पूर्व की ओर होती है और अंत में जाकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है इसमें महानदी, गोदावरी, कावेरी कृष्णा आदि शामिल है

यह सब नदी पूर्व की ओर बहती है तथा कुछ पश्चिम की ओर बहने वाली नदी नर्मदा, ताप्ती आदि इसमें शामिल है इसके अलावा  दक्षिणी प्रायद्वीप पर गोदावरी नदी  दूसरे नंबर की सबसे बड़ी नदियों में से एक है जो द्रोणी क्षेत्र में आती है जो भारत के क्षेत्र का 10% भाग है

गोदावरी नदी के बाद कृष्णा नदी का द्रोणी क्षेत्र में स्थान है फिर गोदावरी नदी के दूसरे नंबर के बाद महानदी का तीसरा स्थान है इसके अलावा नर्मदा नदी कभी ढक्कन के द्रोणी क्षेत्र में आता है यह अरब सागर की तरफ से बहती है और अंत में जाकर बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

अरब सागर में गिरने वाली नदियां जो निम्नलिखित है

साबरमती नदी – इस नदी का उद्गम स्थल राजस्थान के उदयपुर के पास अरावली पर्वत में है तथा बहते हुए अंत में यह खंभात की खाड़ी में जाकर समाहित हो जाती है।

भादर नदी – इस नदी का उद्गम स्थल गुजरात के राजकोट में है तथा यह अंत में अरब सागर में जाकर गिर जाती है।

माही नदी – माही नदी का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के धार जिले के विंध्याचल पर्वत में है यह नदी विंध्याचल पर्वत से निकलने के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान से होते हुए गुजरात राज्य में प्रवेश करती है और अंत में खंभात की खाड़ी में जाकर गिर जाती है तथा इसकी सहायक नदी सॉन्ग और जाखम है।

शतरंजी नदी – इसका उद्गम स्थल गुजरात के अमरेली जिले में है जो अंत में जाकर खंभात की खाड़ी में गिर जाती है।

नर्मदा नदी – इस नदी का उद्गम स्थल, यह मैंकल पर्वत के अमरकंटक चोटी से निकलती है जो मध्य प्रदेश से, गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र में प्रवेश कर जाती है और यह अंत में अरब सागर में गिर जाती है जो प्रायद्वीपीय की सबसे बड़ी नदी है और  यह खंभात की खाड़ी में गिरने पर ज्वारनदमुख का निर्माण करती है तथा इसकी सहायक नदियां तवा, बसेर, माचक, कोनार, हिरन, वरना, शक्कर, दूधी, आदि नदियां हैं।

तापी नदी – इसका उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुल्लाई में है इसकी सहायक नदी पूर्णा है अंत में यह संभाल की खाड़ी में गिर जाती है।

मांडवी नदी – इसका उद्गम स्थल मांडवी नदी कर्नाटक राज्य के पश्चिम घाट पर्वत के भीमगढ़ झरने में है इसके बाद यह पश्चिम दिशा से गोवा राज्य में प्रवेश करती है और अंत में अरब सागर में जाकर गिर जाती है।

शरावती नदी – इसका उद्गम स्थल कर्नाटक राज्य के पश्चिम घाट पर्वत की अंबु तीर्थ नामक पहाड़ी में है अंत में जा कर यह अरब सागर में गिर जाती है।

जुआरी नदी – इसका उद्गम स्थल गोवर राज्य के पश्चिम घाट में है जो बहते हुए अंत में अरब सागर में गिर जाती है।

गंगाबेली नदी – इसका उद्गम स्थल कर्नाटक राज्य के पश्चिम घाट पर्वत में है जो अंत में अरब सागर में गिर जाती है।

पेरियार नदी – इसका उद्गम स्थल अन्नामलाई पहाड़ी में है जो कि रेल मार्ग से होते हुए अंत में अरब सागर में गिर जाती है यह केरल की जीवन रेखा वाली नदी है।

पन्मा नदी – इस नदी का उद्गम स्थल केरल है जो अंत में बेम्बनाद झील में समा जाती है।

भरत पूजा नदी – इसका उद्गम स्थल अन्नामलाई है जो केरल से हो तो यह तमिलनाडु जाती है अंत में यह अरब सागर में गिर जाती है।

दामोदर नदी – इसका उद्गम स्थल छोटा नागपुर पठार के पलामू जिले के पास झारखंड में है फिर अंत में बहते हुए यह पश्चिम बंगाल के हुगली नदी में मिल जाती है।

हुगली नदी – इसका उद्गम स्थल नहीं है यह पश्चिम बंगाल में गंगा नदी की विधिका के रूप में बहती है जो अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिर जाती है।

स्वर्णरेखा नदी – इसका उद्गम स्थल रांची का पठार है अंत में बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

ब्रह्माणी नदी – यह नदी संघ और कोयले की धाराओं से मिलकर बनी है जो उड़ीसा में है तथा यह अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिर जाती है।

वैतरणी नदी – इसका उद्गम स्थल उड़ीसा का क्योंझर जिले में है यह अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिर जाती है।

महानदी – इसका उद्गम स्थल मैकल पर्वत की सिंहाना पहाड़ी में है जो छत्तीसगढ़ से होते हुए उड़ीसा राज्य में प्रवाहित होती है और अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर गिर जाती है।

गोदावरी नदी – इसका उद्गम स्थल नासिक जिले के त्रयंबकम पहाड़ी में है यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है जो महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश राज्यों से होकर बहती है इसकी सहायक नदी दूधना, मंजरा, पूर्ण, प्रणहित, पेनगंगा, सेलूरी, वेनगंगा, इंद्रावती है।

कृष्णा नदी – इसका उद्गम स्थल महाबलेश्वर में है यह नदी महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक से होकर बहती है और अंत में बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाती हुई मिल जाती है इसकी सहायक नदी मुसी, भीमा, मालप्रभा, तुंगभद्रा, दूधगंगा, कोयना, घटप्रभा, वर्णा, पंचगंगा है।

पेन्नार नदी – इसका उद्गम स्थल कर्नाटक के कोलार जिले की नंदी दुर्ग पहाड़ी में है जो अंत में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।

कावेरी नदी – इसका उद्गम स्थल कर्नाटक राज्य के कुल जिले की ब्रह्मा गिरी की पहाड़ी में है इसकी सहायक नदी अर्कवती, लक्ष्मण तीर्थ, सिमाना,  कंबिनी, हेमावती, सुवर्णावती, हेरंगी, भवानी, अमरावती हैं।

ताम्रपर्णी नदी – इसका उद्गम स्थल तमिलनाडु राज्य में है और यह बहते हुए अंत में मन्नार की खाड़ी में जाकर गिरती है इसकी सहायक नदी घग्घर, लुनी, है।

लूनी नदी – इसका उद्गम स्थल राजस्थान के अजमेर जिले के दक्षिण पश्चिम में अरावली पर्वत में है।

घग्घर नदी – किस नदी का उद्गम स्थल कोई विशेष नहीं है यह हिमालय की निकली ढालो से निकलती है और बहते हुए अंत में अनूपगढ़ राजस्थान में विलुप्त हो जाती है इसी नदी को वैदिक काल में सरस्वती नदी के नाम से जाना जाता था।

नदी की अवस्थाएं –

मान्यता के अनुसार नदी की तीन अवस्थाएं होती है जो निम्नलिखित है

  • युवावस्था, 
  • प्रौढ़ावस्था,
  • वृद्धावस्था,

इस लेख में हमने भारत से जुड़ी नदियों के बारे में पढ़ा अतः यह लेख पढ़कर आपको कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स पर जरूर बताएं और इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें,,,

 धन्यवाद।।।

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