चक्रवात (Cyclone) क्या है – Cyclone Meaning In Hindi , साइक्लोन का अर्थ

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Cyclone Meaning In Hindi

नमस्कार दोस्तों इस लेख के माध्यम से हम आपको चक्रवात Cyclone से जुड़ी संपूर्ण जानकारी जैसे – चक्रवात (Cyclone) क्या है ?, साइक्लोन क्यों आता है?,साइक्लोन का अर्थ क्या है? Cyclone Meaning In Hindi ,चक्रवात का नामकरण कैसे होता है?, चक्रवात कितने प्रकार के होते हैं?, तूफान के नाम कैसे रखे जाते हैं?, बवंडर कैसे बनता है?, चक्रवात से क्या क्या हानि होती है?, चक्रवात से बचने के क्या क्या उपाय हो सकते हैं? को पढ़ेंगे तो लेख को अंत तक पढ़ें, चलिए शुरू करते हैं ।

चक्रवात (Cyclone) क्या है Cyclone Meaning In Hindi

Cyclone का हिंदी में अर्थ चक्रवात होता है, चक्रवात (Cyclone) एक मौसमी घटना अर्थात प्राकृतिक निर्मित है इसमें मानव का कोई हस्तक्षेप नहीं , जब किसी स्थान में हवा का झोंका आ रहा हो, और एक तरफ से गर्म हवा,दूसरी तरफ से आ रही होस्थान पर दोनों मिलते हैं अर्थात दोनों के मिलाप से जो हवा, धूल युक्त कण से मिल कर जो बनाती है उसे ही चक्रवात Cyclone का नाम दिया जाता है । तथा देखा जाए तो चक्रवात एक ऐसी संरचना से मिलकर बनता है जिससे गर्म हवा के चारों ओर कम वायुमंडलीय दाब के साथ उत्पन्न होता है ।

चक्रवात (Cyclone) कितने प्रकार के होते हैं.?

अगर मुख्यतः देखा जाए तो चक्रवात छह प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित है।

  1. ध्रुवी चक्रवात
  2. ध्रुवी कम
  3. अतिरिक्त उष्णकटिबंधीयचक्रवात
  4. अंतः उष्णकटिबंधीय
  5. उष्णकटिबंधीयमेसो स्कैन बंधितचक्रवात
  6. बाम्होष्णकटिबंधीय चक्रवात

ध्रुवीचक्रवात – ध्रुवी चक्रवात वास्तव में इनकी उत्पत्ति उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव  में होती है इनकी लंबाई ऊंचाई करीबन 20 किलोमीटर अर्थात यह ट्रोपास्फेयर के ऊपरी भाग तक तथा स्टेटसप्लेयर के लगभग अंदर तक हो सकती है तथा इसे आर्केट चक्रवात भी कहते हैं।

यदि इसकी इतिहास की बात की जाए तो सबसे पहलेयह 1853 में ज्ञात हुआ था वर्ष 1952 में ध्रुवीय तूफानों के बारे में वैज्ञानिक आंकड़ों के हिसाब से नई-नई जानकारी प्राप्त हुई थी।

ध्रुवी चक्रवात चारों ओर जेटस्ट्रीम से घिरे होते हैंध्रुवी चक्रवात के घूमने की गति पृथ्वी के घूमने की गति से कहीं अधिक होती है।

ध्रुवीय कम– जैसे कि नाम से ही पता लग रहा ‘कम’यह कम छोटे पैमाने परकम समय तक जिंदा रहने की दबाव प्रणाली है जोकि उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्ध की मुख्य दूरी अग्रांतके सामने महासागर क्षेत्र में पाई जाती है  यह प्रणाली आमतौर पर बहुत कम दिखाई देती है और यह एक या दो ही दिन बस जीवित रह सकती हैं।

अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात– इस प्रकार के चक्रवात ग्रह के कटी बंधुओं के बाहर मध्य अक्षांश के बीच होते हैं इन सब में उनके क्षेत्र गठन या उत्तर उष्णकटिबंधीय चक्रवात के कारण मध्य अक्षांश चक्रवात के रूप में बताया जाता है और यह एक संक्षिप्त पैमाने पर कम दबाव वाली मौसम प्रणाली है जिनके ना तो उष्णकटिबंधीय और ना ही कोई धुरीय विशेषताएं हैं जो तापमान और जो बिंदु में समांतर ढाल में जुड़ी हुई है।

अंतः उष्णकटिबंधीयचक्रवात – अंतः उष्णकटिबंधीयअभिसरण क्षेत्र एक निम्न वायुदाब वाला क्षेत्र है मानसूनी गत जुलाई के महीने में अंतर उष्णकटिबंधीय में 20 डिग्री से 25 डिग्री उत्तरी अक्षांशओं के लगभग गंगा नदी के मैदान में स्थित हो जाती है इसे कभी-कभी मानसूनी गर्त कहते हैं यह मानसूनी गत उत्तर और दक्षिण पश्चिम भारत पर टट्टी निम्न वायुदाब के विकास को प्रोत्साहित करता है इस चक्रवात के उत्तर की ओर खिसकने के कारण दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक हवाएं 40 डिग्री और 7 डिग्री पूर्वी देशांतर के बीच के प्रभाव से व्रत को पार कर जाती है यह एक बल है।

जिसे केरीयोलिश बल कहते हैं इस बल के प्रभाव से विपुल विषुवत व्रत को पार करने वाली इस व्यापारिक हवाओं की दिशा दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की ओर मुड़ जाती है इसे ही हम दक्षिण पश्चिम मानसून कहते हैं तथा यह पवन शीत ऋतु में दक्षिण की ओर खिसक जाती है इसी सिस्टम के अनुसार पवनों की दिशा दक्षिण-पश्चिम से बदलकर उत्तर पूर्व हो जाती है इसे उत्तर पूर्व मानसून कहते हैं तथा इसे ही अंत: क्षण कटिबंधीयअभिसरणक्षेत्र अर्थात (ITCZ)कहते हैं।

उष्णकटिबंधीयमेसो स्कैन बंधितचक्रवात – उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक चक्रवात का ही प्रकार है जिसमें वायु संगठन या तूफान होते हैं और यह उष्णकटिबंधीय में तीव्र गति से आते हैं अर्थात इसका रूप अत्यंत भीषण वाला होता है यह पहले का कार्य करते हैं लेकिन इसके अलावा अन्य स्थानों पर इस का प्रकोप एकदम साधारण रहता है अर्थात यह शेष सभी जगहों में एक आम तूफान की तरह ही रहते हैं यह ज्यादा हानि का संकेत नहीं देते यदि इनकी गति की बात की जाए तो यह 20 से लेकर 30 मील प्रति घंटा तक के वेग से चलते हैं इनका व्यास 50 से लेकर 1000 मील तक का होता है कई उष्णकटिबंधीय चक्रवात तब विकसित होते हैं जब आसपास के वातावरण में एक कमजोर उपद्रव की स्थिति अनुकूल होती है।

बाम्होष्णकटिबंधीयचक्रवात – इस चक्रवात का उपयोग ऊपरी छोभ मंडल मेंकोल्ड कोर को संदर्भित करने के लिए किया जाता है और अक्सर देखा जाए तो उस उच्च अक्षांशो में मोर्चों के साथ बनता है यह ट्रॉपिकलसाइक्लोन से परे मध्य और उच्च अक्षांश में विकसित होता है जो अक्षांशों में मौसम की स्थिति में अचानक परिवर्तन का कारण बनता है।

चक्रवात (Cyclone) बनता कैसे हैं?

हम इसे कुछ इस तरह से समझ सकते हैं जैसे गर्म देश होते हैं और वहां पर भी समुद्र होते हैं गर्म देश की मौसम गर्मी से हवा गर्म हो जाती है और जैसे ही वह अत्यंत गर्म होती है तब मैं अत्यंत कम वायुदाब का क्षेत्र बनाती है फिर हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर आती है और जैसे ही ऊपर आती है तब ही ऊपर नमी से मिलकर संघनन से बादल बनाती है ।

इस बादल से बने खाली स्थान को भरने के लिए जो नीचे ठंडी हवा होती है वह नम होकर नीचे जाकर तेजी से ऊपर आती है और जब वह आती है तो वह घूमते घूमते ऊपर की ओर आती है और बहुत तेजी से उस क्षेत्र के चारों तरफ घूमती है तब बादल और हवा का संघनन होता है उस संगठन  से मूसलाधार बारिश होने लगती है इसी कारण से चक्रवात बनता है जिसे हम अंग्रेजी में Cyclone कहते हैं और यह अंग्रेजी के V अक्षर के जैसे दिखाई देता है।

चक्रवात (Cyclone) से क्या क्या हानि होती है?

  1. यदि चक्रवात आता है तो सबसे पहले तबाही होती है यदि चक्रवात आता है तो सबसे पहले तबाही होती हैजिसमें पेड़ पौधे नष्ट हो जाते हैं तथा कई पेड़ गिर भी जाते हैं।
  2. यदि चक्रवात पावर में होता है सब चक्रवात के कारण पानी ही गिरने लगता है जिससे अत्यधिक वर्षा का कारण बन जाता है।
  3. इस चक्रवात के चलते कई लोगों की मौत हो जाती है कितने घायल हो जाते हैं जो कि एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
  4. इसके आने की वजह से कई स्ट्रीट लाइट के खंभे भी गिर जाते हैं जिससे आर्थिक हानि भी होती है।
  5. कईबिल्डिंग गिर जाती है और कई मकान, घर तबाह हो जाते हैं।
  6. यदि यह साइक्लोन गांव में आ जाए तब वहां की सारी खेती, फसल बर्बाद कर देता है।
  7. इसकी वजह से कई दिन संचार व्यवस्था में दिक्कत आ सकती है।
  8. इससे लोगों के अलावा कई जीव जंतु पक्षी आदि जानवर की भी मौत हो जाती है और कई पक्षी घायल भी हो जाते हैं।
  9. चक्रवात की वजह से वर्षा होती है इस वर्षा की वजह से कई इलाकों में पानी भर जाता है।
  10. यदि किसी का घर गिर जाता है तब उसे भारी चुनौती का सामना करना पड़ता है।
  11. कई लोग इस चक्रवात की वजह से रोड पर आ जाते हैं ना ही उनके पास खाने के लिए कुछ और ना ही रहने के लिए कुछ रहता है या बचता है।
  12. इससे सरकार को भी भारी नुकसान होता है और उन्हें भी एक लंबी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

चक्रवात (Cyclone) से बचने के क्या क्या उपाय हो सकते हैं?

  1. आपको अपने दूरसंचार से जुड़े रहना होगा जिससे आपको पल-पल की खबर मिलती रहे जिससे आप संकेत रहेंगे।
  2. इस स्थिति में यदि तेज हवा शुरू हो जाती है तब आप को अपने पास इमरजेंसी (तत्काल)लालटेन, सूखे सेल ,फ्लैशलाइट को अपने पास रखना है।
  3. यदि आप पेड़ पौधे के नीचे खड़े हैं या फिर बिजली के तार के आसपास है तो तत्काल वहां से हटे और अपने आप को सुरक्षित करें।
  4. इससे बचने के लिए अपने घरों की मरम्मत समय-समय पर करवाते रहें।
  5. यदि कांच की खिड़कियां है तब उसे पर लगने वाले बोर्ड को लगाएं और उसे बंद कर दें।
  6. यदि आपके घर में ज्वलनशील पदार्थ है तो उसे इस आदत से रखें जिससे तेज हवा चलने पर वह भीषण आग का रूप ना ले ले।
  7. यदि आप किसान हैं तो अपनी फसल की सुरक्षा करें यदि आप की फसल 80% भी तैयार हो गई है तो उसे काट लें।
  8. यदि आपके घरों में गाय जानवर पशु पक्षी है तो आप उसे उचित सेट पर रखें।
  9. यदि आप मछुआरे हो और आप यदि समुद्र के पास रहते हो तो आप तत्काल उसी स्थान से चले जाएं और कहीं रहने की व्यवस्था कर ले।
  10. सबसे जरूरी बात हवाओं से बचें सतर्क रहें सुरक्षित रहें।

चक्रवात (Cyclone) का नामकरण कैसे होता है?

IMD ने भारत के मौसम विज्ञान विभाग ने हाल ही में भविष्य के ट्रॉपिकलसाइक्लोन के 169 नामों की सूची जारी थी जो चक्रवात अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होंगे और यदि यह देखा जाए कि चक्रवात का नाम तैयार कौन करता है तो दुनिया भर के हर महा सागरीबेंजीन में बनने वाले चक्रवातो का नाम क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMCS) और उष्णकटिबंधीय चक्रवात चेतावनी केंद्र (TCWCS) द्वारा रखा जाता है भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और 5 (TCWUC) समेत दुनिया में छह (RSMC) केंद्र है।

भारत में कौन से कटिबंधीय चक्रवात आते हैं ?

यदि देखा जाए तो शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति और प्रभाव दोनों ही क्षेत्र शीतोष्ण कटिबंध ही मतलब मध्य अक्षांशों में होते हैं और यह जो अब चक्रवात हैं यह सिर्फ और सिर्फ शीत ऋतु में उत्तरी गोलार्ध में केवल उत्पन्न होता है जबकि दक्षिण गोलार्ध में जल विभाग के अधिक होने के कारण यह साल भर उत्पन्न होते रहते हैं।

भारत में चक्रवात (Cyclone) की उत्पत्ति कैसे होती है ?

भारत में चक्रवात अधिकतर बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होता है और इसकी दिशा पूर्वी से पश्चिम की ओर रहती है और यह पश्चिम दिशा की ओर होने की वजह से पूर्वी घाट पर्वत से टकराते हैं और इसके परिणाम स्वरूप चक्रवाद से वर्षा उत्पन्न होती है और शुरू हो जाती है।

दक्षिणायन सूर्य 21 जून और सूर्य विषुवत रेखा पर लंबवत चमकने लगता है 22 या 23 सितंबर तक इस सब के परिणाम स्वरूप जुलाई महीने से अनुषणकटिबंधीयअभिसरण क्षेत्र (ITCZ) भी दक्षिण की ओर खिसकने लगता है और यह एक समय में प्रदीप पी के दक्षिणी छोर को पार कर जाता है सितंबर के पहले सप्ताह तक या उससे पहले भी पार कर जाता है।

और यदि भूकंप आने की स्थिति देखी जाए तो भारत के पूर्व एक पश्चिम में स्थित बंगाल की खाड़ी और अरब सागर अत्यंत गर्म हो जाते हैं और बंगाल की खाड़ी का गर्म जल सतरउष्णकटिबंधीय चक्रवात के लिए आदर्श दर्शाए दे देते हैं जिसकी वजह से बंगाल की खाड़ी में उष्णचक्रवात उत्पन्न होते हैं और यह पूर्वी जट धाराओं के सहारे पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने लगते हैं और पूर्वी घाट से टकराकर तमिलनाडु आंध्र प्रदेश में वर्षा करते हैं।

चक्रवात (Cyclone) का अंत कैसे होता है यह खत्म कैसे होते.?

जैसे कि हम सब जानते हैं कि चक्रवात घूमते रहते हैं अर्थात भ्रमण सील होते हैं जब चक्रवात पूर्ण रूप से उष्णकटिबंधीय सागरीय जल से गमन करते हुए ठंडे क्षेत्रों में चले जाते हैं तब चक्रवात (CYCLONE) को केंद्र से मिलने वाली संगठन की गुप्त उष्णता बाधित हो जाती है जिससे अंत में यह खत्म हो जाता है अर्थात इसकी मृत्यु हो जाती है।

चक्रवात घूमते घूमते एक स्थान से दूसरे स्थान में प्रवेश करता है तब भी चक्रवात को प्राप्त होने वाली केंद्र संगठन की उष्मा बाधित हो जाती है और अंत में इसकी मृत्यु हो जाती है।

हाल ही में देखा जाए तो चक्रवात से हुई तबाही…..

एक चक्रवात जो 18 मई 2021 को सौराष्ट्र जैसे कई इलाकों में अपार तबाही मचा दिया था इस चक्रवात के आने के कारण लोगों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा और यदि देखा जाए तो चक्रवात ने अहमदाबाद मुंबई गुजरात जैसे राज्यों में तबाही मचाते हुए महाराष्ट्र और गोवा तक पहुंच गया और वहां पर भी कहर मचा दी इस चक्रवात का नाम ताऊते रखा गया और और इस ताऊते की स्पीड 185 किलोमीटर प्रति घंटे के लगभग थी अंत मैं प्रधानमंत्री मोदी जी ने इस तूफान से आई तबाही का पूर्ण जायजा लिया तथा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने भी टट्टी इलाकों में मौजूद लोगों की पल-पल की खबर ली साथ ही ताऊते तूफान को लेकर बनाया गया कंट्रोल रूम में बैठकर जायजा लिया।

भारत में चक्रवात (Cyclone In India)

जैसे की हम सभी जानते हैं कि तूफान बताकर नहीं आता अतः इस तालिका में कुछ ऐसे तूफान भी है जिसमें कई मासूमों की जान भी चली गई कई के घर बर्बाद हो गए चलिए जाने आखिर कितने बार इस चक्रवर्ती तूफान ने भारत में तबाही मचाई भारत में आए चक्रवर्ती तूफान की तालिका नीचे दी हुई है।

 नीचे दी गई है-

वर्ष   राज्य  चक्रवात का नाम
2010   आंध्र प्रदेश  लैला
2012   आंध्र प्रदेश  नीलम
2013   आंध्र प्रदेश  लहर
2013   आंध्र प्रदेश  हेलन
2014   आंध्र प्रदेश  हुदहुद
1991   तमिलनाडु  बीओबी09
1992   तमिलनाडु  बीओबी06
1993   तमिलनाडु  बीओबी03
1996   तमिलनाडु  08बी
2000   तमिलनाडु  बीओबी05
2005   तमिलनाडु  फनूस
2008   तमिलनाडु  निशा
2010   तमिलनाडु  जल
2011   तमिलनाडु  थेन
2013   तमिलनाडु  नीलम
2013   तमिलनाडु  माडी
1994   महाराष्ट्र  एआरबी02
2009   महाराष्ट्र  फ्यान
2010   महाराष्ट्र  जल
1996   गुजरात  एआरबी01
1998   गुजरात  एआरबी02
1998   गुजरात  एआरबी05
2001   गुजरात  एआरबी01
2004   गुजरात  ओनिल
2007   गुजरात  येमयिन
1999   उड़ीसा  बीओबी05
1999   उड़ीसा  बीओबी06
2013   उड़ीसा  फैलिन
2014   उड़ीसा  हुदहुद
1992   कर्नाटक  बीओबी06
1993   कर्नाटक  बीओबी03

तो इस लेख में अपने चक्रवात Cyclone से जुड़े सभी जानकरी को प्राप्त किया उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी इस लेख को आप अपने दोस्तों को भी जरूर शेयर करे धन्यवाद ।

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